सहारनपुर। नगर निगम में जो हो जाए वह कम है। ताजा मामला पार्षदों और उनके परिजनों द्वारा ठेकेदारी करने से जुड़ा है। मनाही के बावजूद आधा दर्जन से अधिक पार्षद या उनके परिजन अपनी कंपनियों के नाम से लाखों के ठेके लेकर मोटा कमीशन अंदर कर रहे हैं। चूंकि एक-एक ठेके की फाइल अधिकारियों के हस्ताक्षर से आगे बढ़ती है। ऐसे में यह कहना गलत होगा कि अधिकारियों को पार्षदों द्वारा लिए गए ठेकों की जानकारी नहीं है।
नियमानुसार महापौर, पार्षद और उनका कोई परिजन (ब्लड रिलेटिव) नगर निगम में ठेकेदारी नहीं कर सकता है। मगर यहां ऐसे नियम और कायदे बेमानी है। वर्तमान में आधा दर्जन से अधिक पार्षद या तो सीधे तौर पर नगर निगम के लाखों के ठेके लेकर काम में जुटे हैं या फिर कुछ पार्षदों ने अपने पतियों और अन्य परिजनों को ठेके दिलाए हैं। निगम सूत्रों ने बताया कि दो दिन पहले पार्षद और एक पार्षद पति के बीच जो विवाद हुआ उसमें पार्षद पति ठेकेदार की भूमिका में था। यह भी बताया है कि पार्षदों ने ठेके के लिए कंपनियां बनाई हुई हैं, जिनके नाम से ठेके छुड़वाए जा रहे हैं।
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नियमानुसार महापौर और पार्षद या उनके परिजन निगम में ठेकेदारी नहीं कर सकते हैं। यदि ऐसा हो रहा है तो यह गंभीर मामला है। ऐसे पार्षदों को चिह्नित कराया जाएगा, जिन्होंने अपने नाम से या अपने परिजनों के नाम से ठेके लिए हुए हैं। जांच में दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।