सहारनपुर। शब्बीरपुर जातीय संघर्ष के विरोध में नौ मई को हुई सहारनपुर हिंसा के प्रमुख आरोपियों में शामिल भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन को कोर्ट से जमानत मिल गई है। हालांकि अभी वह जेल से बाहर नहीं आ सका है।
सहारनपुर को नौ मई को जातीय हिंसा की आग में धकेलने के आरोपी भीम आर्मी का राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन मुख्य आरोपियों में शामिल है। विनय रतन हिंसा के बाद भीम आर्मी संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण, राष्ट्रीय प्रवक्ता मंजीत सिंह नौटियाल और जिलाध्यक्ष कमल सिंह वालिया के साथ फरार हो गया था। जिस कारण अन्य के साथ विनय रतन पर भी 12 हजार का इनाम घोषित किया गया था। सभी लोग एक-एक करके जेल चले गए थे, लेकिन पुलिस ने विनय रतन को नहीं पकड़ा। हालांकि विनय रतन लगातार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने आता रहा, मंच से भाषण भी देता रहा, लेकिन पुलिस ने गिरफ्तारी नहीं की। हालांकि विनय रतन की पुलिस कागजों में पूरी कार्रवाई करती रही। उसे भगोड़ा दिखाकर उसके कुर्की के वारंट भी ले लिए और उसके सामने ही पुलिस ने उसके घर पर कुर्की का नोटिस चस्पा किया। वह खड़ा हुआ हंसता रहा।
यही नहीं 23 अप्रैल को विनय रतन कोर्ट में सरेंडर करने की सुबह 8 बजे ही एलान कर दिया कि वह पूर्वाह्न 11 बजे कोर्ट पहुंचेगा। सभी अधिकारियों को भी इसकी सूचना मिल गई। कोर्ट में विनय रतन 11 की बजाय 12 बजे पहुंचा और सरेंडर कर दिया। लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ने का कोई प्रयास नहीं किया। जबकि मारपीट के किसी छोटे से मामले के आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस एसी नाकाबंदी करती है कि आरोपी कोर्ट केे आसपास भी जाने की हिम्मत नहीं करता। अभी पूरा एक माह भी विनय रतन को जेल जाए नहीं हुआ, पुलिस की पैरवी न हो पाने के चलते उसे आसानी से पिछले सप्ताह जमानत मिल गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार किसी भी पुलिस अधिकारी ने पैरवी करने की जहमत नहीं उठाई। लचर पैरवी के चलते विनय रतन को जमानत मिल गई। हालांकि अभी तक विनय रतन जेल से बाहर नहीं आ सका है। बताया जा रहा है कि अभी विनय रतन की जमानत लेने वाले लोगों की पुलिस जांच कर रही है। एसपी सिटी प्रबल प्रताप सिंह ने बताया कि भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को सभी आरोपों में जमानत मिल गई है। लेकिन अभी विनय रतन जेल में ही है।