देवबंद (सहारनपुर)। अयोध्या विवाद पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारी सदस्य मौलाना सलमान हुसैन नदवी के आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर से मिल कर इस मुद्दे को कोर्ट के बाहर सुलझाने का समर्थन करने पर जमीयत उलमा-ए-हिंद समेत देवबंदी उलमा ने कड़ा ऐतराज जताया है। जमीयत अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने तो यहां तक कहा कि वह इस मामले को हैदराबाद में चल रही पर्सनल लॉ बोर्ड में मीटिंग में उठाएंगे।
आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर बाबरी मस्जिद-रामजन्म भूमि विवाद पर कोर्ट के बाहर मध्यस्थता कराने के प्रयास में हैं। बृहस्पतिवार को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारी सदस्य मौलाना सैय्यद सलमान हुसैन नदवी ने श्रीश्री रविशंकर से मुलाकात कर इस मामले में कोर्ट के बाहर समझौते का समर्थन किया था। इसको लेकर जमीयत उलमा-ए-हिंद और देवबंदी उलमा ने सख्त नाराजगी का इजहार किया है। जमीयत के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि अगर कोई निजी तौर पर मुलाकात करता है तो उसमें हमें कोई ऐतराज नहीं है, लेकिन बेहद पेचीदा मसले पर पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से मुलाकात करना अफसोसनाक है और इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद का मसला कानून का है जो अदालत से हल होगा और हमें इंसाफ मिलने की पूरी उम्मीद है। मगर अदालत से बाहर इस पर कोई हल निकालने की बात करता है तो वे हमें कबूल नहीं है। मौलाना मदनी ने दो टूक कहा कि वह हैदराबाद में चल रही बोर्ड की बैठक में जाकर पूछेंगे की सलमान नदवी किस हैसियत से श्रीश्री रविशंकर से मिले। दारुल उलूम वक्फ के शेखुल हदीस मौलाना अहमद खिजर शाह मसूदी ने कहा कि जब यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है तो फिर इस पर बाहर वार्ता करने का क्या मतलब है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस मामले को देख रहा है और अपना रुख पूरी तरह साफ कर चुका है। ऐसे में सलमान नदवी का इस मुद्दे पर श्रीश्री रविशंकर से मिलना कई सवाल खड़े करने वाला है। मौलाना सगीर कासमी का कहना है कि ऐसा लग रहा है कि मौलाना सलमान नदवी शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी के रास्ते पर चल रहे हैं। इस मुलाकात की जितनी निंदा की जाए कम है।