बेहट (सहारनपुर)। बृहस्पतिवार सुबह करीब पौने छह बजे कोरसेंट से भरी तीन ट्रैक्टर-ट्रालियों को मिर्जापुर पुलिस ने शिकायत होने पर जाटोवाला गांव से पकड़ तो लिया, लेकिन पजनेकी नदी में ले जाकर ट्रालियों को खाली कराने के बाद चालकों को ट्रैक्टर-ट्रालियों समेत मौके से भगा दिया। इस मामले में माफियाओं से पुलिस का लेनदेन होने की चर्चा भी दिन भर आम रही।
अपनी गर्दन बचाने के लिए पुलिस ने बाद में खनन सामग्री गंदेवड़ पर बने पुल पर चल रहे कार्य के लिए लेकर जाने की बात कही और पीडब्ल्यूडी के जेई से इसकी पुष्टि किए जाने बात को भी कहा, लेकिन पुलिस की यह कहानी भी फ्लाप हो गई। जब कोरसेंट से लदी यह ट्रैक्टर-ट्रालियां गंदेवड़ पुल पर निर्माण कार्य के लिए ले जाई जा रही थी, तो पुलिस उन्हें जाटोवाला गांव से पकड़ने के बाद वापस मिर्जापुर से आगे पजनेकी नदी के पुल के पास क्यों ले गई? और उन्हें वहां खाली क्यों कराया गया? इससे पुलिस के लिए सच्चाई छिपानी और भी मुश्किल हो रही है, हालांकि पुलिस के सर्किल अधिकारी गंदेवड़ पुल पर चल रहे कार्य की आड़ लेकर मिर्जापुर पुलिस की गर्दन बचाने में लगे हैं।
प्रभारी मंत्री ने यमुना नदी में पकड़ा था अवैध खनन
बेहट। अवैध खनन को लेकर पुलिस प्रशासन की पोल पहले भी खुल चुकी है। खुद सूबे के काबीना एवं प्रभारी मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने पिछलों दिनों ने यमुना नदी में पहुंचकर खुद अवैध खनन होते पकड़ा था। इस मामले में बेहट कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक वेदप्रकाश गिरि समेत कई पुलिसकर्मियों पर गाज भी गिरी थी और पुलिस ने बड़े पैमाने पर अवैध खनन करने वाले माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनकी धरपकड़ की थी, लेकिन मिर्जापुर पुलिस के लिए एनजीटी की रोक और प्रदेश सरकार की सख्ती कोई मायने नहीं रखती।
गंदेवड़ में पूर्वी यमुना नहर के नवनिर्मित पुल पर कार्य चल रहा है, जिसके लिए खनन सामग्री लाई जा रही थी। पुलिस ने सूचना पर तीनों ट्रैक्टर-ट्रालियों को पकड़ लिया था, लेकिन पीडब्ल्यूडी के जेई द्वारा प्रमाणित किए जाने पर तीनों को नियमानुसार छोड़ दिया गया।
शिवराज सिंह, सीओ बेहट
धर्मेंद्र मोहित