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रूठों को मनाने की कवायद में जुटे नेताजी

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सहारनपुर। लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन हो चुके हैं। अब प्रत्याशियों के सामने रूठों को मनाने की चुनौती है। रूठने वालों में ऐसे लोग शामिल हैं, जो टिकट की दावेदारी कर रहे थे, तो कुछ ऐसे भी हैं जो पुराने चुनाव में मिली चोट का दर्द याद करते हैं। ऐसे रूठों को मनाने में नेताजी की काफी भागदौड़ करनी पड़ रही है।
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चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए प्रत्याशी कोई कोर कसर छोड़ना नहीं चाहते हैं, यही वजह है कि रूठों को मनाने के लिए अब उनके घर तक जाने में भी कोई परहेज नहीं है। रूठों को मनाने की कवायद सिर्फ एक पार्टी में नहीं, बल्कि सभी दलों में यही स्थिति है। सोमवार को ही भाजपा के एक पूर्व विधायक को मनाने के लिए भाजपा नेता उनके घर पहुंचे और नामांकन पत्र जमा कराने के लिए साथ चलने की बात कही। फिर वह भी नामांकन पत्र जमा कराने कलक्ट्रेट में साथ पहुंचे। इन नेताओं के बीच 2017 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद से नाराजगी बताई जा रही थी।
ऐसा ही कुछ प्रयास दूसरे दलों में भी चल रहा है। पार्टी में पद न मिलने अथवा अन्य कारणों से जो नाराज हो गए थे, उन्हें किसी न किसी तरह से मनाने का प्रयास किए जा रहे हैं। रूठने वालों में वह लोग भी हैं, जो टिकट पाने के लिए भागदौड़ कर रहे थे, लेकिन अपने प्रयास में कामयाब नहीं हो सके। अब नेताओं का यही प्रयास है कि जैसे भी हो, बस जीत मिल जाए। क्योंकि चुनाव में अपनों की नाराजगी भारी नुकसान पहुंचा सकती है। उधर, पार्टी के नेताओं के अलावा क्षेत्र के उन लोगों के यहां भी पहुंचकर मान मनौव्वल किया जा रहा है, जो किसी न किसी वजह से नाराज थे।
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रहता है डर, विरोधी को न कर दें सपोर्ट
रूठों को मनाने के पीछे बड़ी वजह यही है कि अपने कुनबे का व्यक्ति यदि बगावत पर उतर आया, तो विरोधी को फायदा मिल जाता है। क्योंकि वह उतनी मेहनत नहीं करता, बल्कि अपने असर वाले जातीय समीकरण को गड़बड़ाने की कोशिश करता है। चूंकि चुनाव में एक एक वोट की अहमियत होती है, इसलिए नेता कोई जोखिम नहीं लेना चाहते हैं।
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