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तापमान और लुढ़का, शीत ने बढ़ाई ठिठुरन

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सहारनपुर। मौसम कहर बरपाने लगा है। बीते कई दिन से तापमान लगातार लुढ़क रहा है तथा शीत लहर चल रही है। इस कारण आम जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। कोहरे के असर की वजह से ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, तो कड़ाके की ठंड में ठिठुरन बढ़ गई है।
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आलम यह है कि शुक्रवार को दिन भर सूर्य बादलों में छिपा रहा, जिस कारण कंपकंपी बढ़ गई। शीत लहर ने तो दुश्वारियां बढ़ा दी हैं। मुजफ्फराबाद स्थित मौसम वेधशाला के मुताबिक शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 1 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इस साल में अभी शुक्रवार सबसे ठंडा दिन रहा है, लेकिन अगले कुछ दिन में तापमान में और गिरावट होने की उम्मीद की जा रही है। कड़ाके की ठंड के कारण सबसे ज्यादा परेशानियां दैनिक यात्रियों को झेलनी पड़ रही हैं। ट्रेन और बसों में सफर करने वाले लोग गर्म कपड़ों के अलावा मफलर और गर्म कैप लगाकर चल रहे हैं। वहीं, बच्चों को सुबह स्कूल भेजने के लिए भी परेशानियां हो रही हैं।
बरसात नहीं हुई, तो फसलों को होगा नुकसान
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डाक्टर आईके कुशवाहा का कहना है कि गेहूं की बुवाई के लिए नवंबर से 25 दिसंबर का समय उपयुक्त माना जाता है। अभी तक मौसम का जो हाल है, यदि ऐसा ही रहा तो फसलों के लिए काफी नुकसानदायक होगा। क्योंकि फसलों और बागवानी को हल्की बौछार की जरूरत होती है, लेकिन अभी बरसात होने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। फिलहाल सूखी सर्दी पड़ रही है। पूर्व में बेहट क्षेत्र में पाला पड़ने के कारण बागों में फसल बर्बाद हो गई थीं। उन्होंने बताया कि गेहूं की बुवाई यदि दिसंबर में की जाती है, तो दो क्विंटल प्रति हेक्टेयर कम पैदावार आती है, जबकि नवंबर तक बुवाई में पर्याप्त पैदावार होती है। क्योंकि गेहूं की फसल अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह तक पक जाती है। यदि किसान अब जनवरी में गेहूं की फसल की बुवाई करते हैं, तो उससे उपज तीन क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक कम होगी। उन्होंने बताया कि सब्जी, दाल, चना, मटर, आलू, बागवानी आदि में हल्की सिंचाई करनी उपयोगी है तथा सल्फर का छिड़काव करना भी लाभकारी है।
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