नकुड़ (सहारनपुर)। कथा वाचक पंडित भगवती प्रसाद शुक्ल ने कहा कि जिस प्रकार ताला जिस चाबी से बंद होता है उसी चाबी से खुलता है। उसी प्रकार मनुष्य का मन है तथा मन ही मनुष्य को बंधन में डालता है तथा मन ही मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति कराता है।
श्री राधे गोविंद सेवा समिति के तत्वाधान में श्री रामलीला भवन में चल रहे श्रीमद्भागवत ज्ञानामृत सप्ताह के दूसरे दिन कथा व्यास पंडित भगवती प्रसाद शुक्ला ने बताया कि जिस मंत्र में धीमहि लग जाता है वह मंत्र स्वत: ही गायत्री मंत्र बन जाता है। यह गायत्री मंत्र श्रीमद्भागवत का आधार हैं और यही श्रीमद्भागवत का विस्तार है। उन्होंने बताया कि मनुष्य का मन बड़ा चंचल है। यदि मनुष्य मन को वश में कर ले तो उसके ऊपर काम क्रोध लोभ मोह आदि हावी नहीं होंगे तथा न हीं मनुष्य बंधन में पड़ेगा। जब मनुष्य बंधन में नहीं पड़ेगा तो उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी। उन्होंने बताया कि मन को वश में करने का अच्छा उपाय ईश्वर की भक्ति है। मनुष्य ईश्वर की भक्ति से अपने सभी इच्छाओं पर पार पा सकता है। कथा में राकेश गुप्ता, जादो राम गुप्ता, हरीश गर्ग, विकास धीमान, विनय धीमान, सुखबीर सहगल, वरुण मित्तल, आलोक जैन, अनूप शर्मा, सचिन शर्मा, मनोज गोयल, मनोज शर्मा, दीपक उपाध्याय, ज्योति, बबीता, मंजू, निर्मला आदि रहे।