यूपी बोर्ड के परीक्षा केंद्र निर्धारण में मानकों की अनदेखी
सहारनपुर। यूपी बोर्ड परीक्षाओं के लिए केंद्रों के निर्धारण में मानकों की अनदेखी की गई है। आलम यह है कि निर्धारित परीक्षा केंद्रों में से अनेक में न तो सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और न ही खिड़की और दरवाजे दुरुस्त हैं। शौचालयों की हालत भी खराब है। ऐसे में चयन प्रक्रिया पर सवाल उठना लाजिमी है। शिक्षक संघ खुद विरोध करने को सामने आए हैं।
इस बार यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया ऑनलाइन अपनाई गई है। इसमें परीक्षा केंद्र बनने के लिए कॉलेजों से ऑनलाइन ही आवेदन मांगे गए थे। चार दिन पहले ही माध्यमिक शिक्षा परिषद ने 84 केंद्रों की सूची जारी की है। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय ने उक्त सूची को तमाम जीआईसी और जीजीआईसी में चस्पा कराया है, जिनपर आपत्तियां मांगी गई हैं। सूची में अनेक ऐसे कॉलेजों के नाम शामिल हैं, जिनके पास सीसीटीवी कैमरा तो दूर की बात शौचालय तक दुरुस्त नहीं हैं। इसके अलावा खिड़की, दरवाजे और बाउंड्री वॉल तक टूटी पड़ी हैं। ऐसे केंद्रों पर परीक्षा के दौरान नकल होने की पूरी आशंका है। इसी वजह से जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में बड़ी संख्या में आपत्तियां पहुंची हैं। कुछ लोग केंद्र निर्धारण में घोर लापरवाही बरते जाने का आरोप भी लगा रहे हैं।
सेल्फ सेंटर के लिए अटैच की छात्राएं
लड़कियों की सुरक्षा और सहूलियत की वजह से यूपी बोर्ड में गर्ल्स कॉलेजों को सेल्फ सेंटर बनाया जाता है, जिससे छात्राओं को परीक्षा के लिए भटकना न पड़े। कुछ कॉलेज इसका गलत फायदा उठा रहे हैं। चिलकाना क्षेत्र में अनेक ऐसे कॉलेज हैं, जिनको सेल्फ सेंटर बनवाने के लिए कॉलेज प्रबंधकों ने अन्य कॉलेजों की छात्राओं को अपने यहां अटैच कर उनकी संख्या अधिक दर्शाई है। आरोप है कि कॉलेज प्रबंधकों का मकसद सेल्फ सेंटर बनवाना है।
शिक्षक संघ भी जता चुका है विरोध
परीक्षा केंद्र निर्धारण प्रक्रिया पर शिक्षक नेता भी आपत्ति जता चुके हैं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (चेतनारायण गुट) के प्रांतीय मंत्री रजनीश चौहान का आरोप है कि केंद्र निर्धारण में घोर लापरवाही बरती गई है। उन्होंने इसकी शिकायत जल्द ही डीएम और उच्चाधिकारियों से करने की बात कही है।
राजकीय विद्यालयों तक में नहीं सीसीटीवी कैमरे
जिला विद्यालय निरीक्षक ने करीब दो महीने पहले तमाम माध्यमिक विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को पत्र लिखकर अपने यहां सीसीटीवी कैमरे लगवाने के निर्देश दिए थे। यूपी बोर्ड के लिए परीक्षा केंद्र बनाए जाने के लिए भी सीसीटीवी कैमरे लगे होने की शर्त रखी गई थी। मगर हैरत की बात यह है कि जिले में मौजूदा राजकीय हाई स्कूलों और इंटर कॉलेजों में से करीब 90 फीसदी कॉलेजों में सीसीटीवी कैमरे नहीं लग सके हैं।
यूपी बोर्ड के लिए परीक्षा केंद्रों की सूची जारी की गई है, जिनपर आपत्ति मांगी गई हैं। यदि किसी ऐसे कॉलेज का नाम सूची में है, जिसके पास मूलभूत सुविधाओं का अभाव है तो बाहर करने का काम किया जाएगा। रही बात सीसीटीवी कैमरे लगने की तो अभी तक अनेक राजकीय कॉलेजों में भी सीसीटीवी कैमरे नहीं लग पाए हैं। पूर्व की तरह इस बार भी परीक्षा को नकल विहीन कराना हमारी पहली प्राथमिकता रहेगी।
आरके तिवारी, डीआईओएस ।