बेहट (सहारनपुर)। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन एवं बज्मे निदाए उर्दू के बैनर तले स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एक शाम शहीदों के नाम मुशायरे का आयोजन किया गया। इसमें शायरों ने एक से बढ़कर एक कलाम पेश कर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी।
मोहल्ला महाजानान में स्थित एक पैलेस में आयोजित मुशायरे का उद्घाटन ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष आलोक तनेजा एवं समाजसेवी हाजी अहसान कुरैशी ने संयुक्त रूप से किया और शमां रोशन कांग्रेसी नेता संजीव कर्णवाल उर्फ बोबी ने की। मुशायरे का आगाज मौलाना इदरीश वासिल ने नाते पाक से किया। उन्होंने पढ़ा- कोशिशें अमन की नाकाम ना होने देंगे, हम सितमगर के सितम आम ना होने देंगे। वसीम झिंझानवी ने पढ़ा- इसी मिट्टी से पैदा हूं, यहीं पर जान छोडूंगा, मैं हिंदुस्तां का मुस्लिम हूं ना हिंदुस्तान छोडूंगा। डॉ. साबिर बेहटवी ने पढ़ा- कौन से जीने से आजादी की छत तक वो गए, पांव जिनके हो गए कुर्बान उनसे पूछिए। सज्जाद झंझट ने अपने कलाम से सभी को लोटपोट कर दिया। उन्होंने पढ़ा- इतना तरसाया है शादी की तमन्ना ने मुझे, अब तो हर शख्स मुझे अपना ससुर लगता है। बरकत हौलट ने पढ़ा- जो तकुब्बर में चूर होता है, नाश उसका जरूर होता है। आतिफ कुरैशी ने पढ़ा- रहती है सदा मुश्किलें सहमी हुई मुझसे, ये मां की दुआओं का असर देख रहा हूं। मिर्जा अब्दुल खालिक ने पढ़ा- हमने चराग दिल के जलाए अगर कभी, डाली नहीं किसी ने करम की नजर कभी। शादाब नियाजी ने पढ़ा- यहां सुनता नहीं कोई किसी की, हर एक इंसान पत्थर हो गया है। फय्याज अहमद फय्याज ने पढ़ा- अजब इंसान हूं ये क्या तमाशा कर लिया मैने, जरूरत रोशनी की थी अंधेरा कर लिया मैने और सैय्यद राशिद ने पढ़ा- वाकिफ नहीं थे फितरते अहले जहां से हम, खा बैठे जख्म इसलिए हर मेहरबां से हम। इसके अलावा भी कई शायरों ने अपने बेहतरीन कलाम से समां बांधे रखा।
मुशायरे की सदारत पीरू मियां और निजामत रहमान मुस्विर ने की। इस मौके पर ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के तहसील अध्यक्ष शैंकी अरोड़ा, संरक्षक एसएम हुसैन जैदी, नौशाद राही, तौफिक मलिक, कुर्बान, तसलीम अत्तार, शौकत कामरेड, दानिश, हारुन नबी, सुधीर कर्णवाल, जोनी मलिक, मारूफ मिर्जा, खुर्शीद आलम, अकरम मलिक, डॉ. इमरान, अब्दुल सत्तार शेख, मुस्तफा कुरैशी आदि की मौजूदगी रही।