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उतोतम शौच

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चिलकाना/नानौता। दशलक्षण पर्व के पांचवें दिन उत्तम शौच के रूप में मनाया गया। जैन मंदिर में श्रद्धालुओं ने श्रीजी की पूजा अर्चना की गई तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।
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मंगलवार को चिलकाना के श्री दिगंबर जैन मंदिर में पंडित ऋषभ जैन ने कहा कि शरीर तथा आत्मा की शुद्धि तथा शुचिता ही उत्तम शौच के रूप में जाना जाता है। मनुष्य को दूसरे के वैभव को नहीं वरन दुखों को देखना चाहिए। लोभ को त्यागकर शौच को अंगीकार करना चाहिए। प्रात: काल जैन मंदिर में श्रीजी का अभिषेक तथा पूजा अर्चना की गई। चिलकाना के जैन मंदिर में पंडित धीरज कुमार जैन ने प्रवचन करते हुए कहा कि मानव का आचरण ऐसा होना चाहिए, जिससे किसी को ठेस नहीं पहुंचे। उन्होंने कहा कि जन तथा जिन में इतना ही अंतर है कि एक के ऊपर बैठा है एक वैभव के ऊपर बैठा है। जो हमें प्राप्त है उसी को पर्याप्त समझना चाहिए। मंदिर में श्रीजी की पूजा अर्चना के बाद भजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
नानौता के मुख्य बाजार स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में जैन समाज के चल रहे दशलक्षण धर्म का पांचवां दिन उत्तम शौच के रूप में मनाया गया। सुबह के समय जैन मंदिर में बडी संख्या में महिलाएं एवं पुरूष इकठठे हुए और जलाभिषेक एवं पूजा-अर्चना की गयी। धर्म प्रेमियों द्वारा मंदिर में उत्तम शौच धर्म की पूजा की गयी। जैन समुदाय के लोगों के अनुसार आत्मा का स्वरूप ही शौच धर्म है। इसीलिए महामुनि इसी का ध्यान करते हैं। पूजा अर्चना एवं जलाभिषेक करने वालों में आशीष जैन, मनोज जैन बर्तन वाले, पंकज जैन बर्तन वाले, मनोज जैन सर्राफ, रितु जैन, ख्याति जैन, निशि जैन, तरूण जैन, जिनेंद्र जैन, नितिन जैन, सरोज जैन, आकाश जैन, विजय जैन, कविता जैन, चिंतामणि जैन, सरोज जैन, स्नेह जैन, प्रमोद जैन, अंकुर जैन सर्राफ, हिमांशु जैन, विशाल जैन, धनेंद्र जैन आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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