सहारनपुर। जनपद में स्वाइन फ्लू के कई मामले सामने आने के बाद खांसी और जुकाम के सामान्य मरीजों में भी एक अजीब सी दहशत बन गई है। निजी डॉक्टरों के पास पहुंच रहे खांसी और जुकाम के सामान्य मरीज भी स्वाइन फ्लू की जांच कराने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में चिकित्सक सही इलाज के साथ ही सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
फिजीशियन डॉ. संजीव मिगलानी ने सर्दी के मौसम खांसी और जुकाम होना आम बात है, जिसे स्वाइन फ्लू मान लेना ठीक नहीं है, मगर लापरवाही भी ठीक नहीं है। उनका कहना है कि स्वाइन फ्लू से डरें नहीं, बल्कि सावधानी बरतें। जैसे यदि किसी व्यक्ति को अपने भीतर स्वाइन फ्लू के लक्षण नजर आएं तो वह तुरंत नजदीकी अस्पताल और अच्छे चिकित्सक के पास जाकर अपना इलाज कराए। ऐसा मरीज खांसते और छींकते हुए नाक और मुंह पर कपड़ा रखे। बलगम को बहते हुए पानी में थूकें। पूरी तरह ठीक होने तक मुंह पर मास्क लगाकर रखें। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें। किसी भी ग्रसित व्यक्ति के चुंबन न करें। परिजनों को चाहिए कि वह संक्रमित व्यक्ति के कपड़े अलग रखें और अलग ही धुलें। उन्होंने बताया कि जिन मरीजों में स्वाइन फ्लू की आशंका रहती है उनका सैंपल पांच दिन के अंदर जांच को भेज देना चाहिए। स्वाइन फ्लू के लिए ओएसएलटामवीर (टेमोफ्लू) और जोनामवीर (विलेंजा) हैं, जो सभी सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।
स्वाइन फ्लू के लक्षण
- बुखार और मांसपेशियों में दर्द होना।
- खांसी और नाक का बहना।
- सिर दर्द तथा गले में खराश होना।
- डायरिया, उल्टी और भूख ना लगना।
- सांस लेने में परेशानी होना।
स्वाइन फ्लू की जटिलताएं
- न्यूमोनिया, ब्रोनकाइटिस और साइनोसाइटिस होना।
- कान में इंफेक्शन होना और फेफड़ों का फेल हो जाना।
इन लोगों को अधिक खतरा
- 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और दमा के मरीजों को।
- डायबिटीज और दिल के मरीजों को।
- किडनी के मरीजों और एचआईवी पॉजिटिव मरीजों को।