सहारनपुर। उपभोक्ताओं से विद्युत बिल वसूलने और मीटर रीडिंग लेने का ठेका प्राइवेट कंपनी से कराना निगम को भारी पड़ रहा है। अभिलेखों में दर्ज कराई गई मीटर रीडिंग और मौके पर रीडिंग में फर्क सामने आया है। शासन के निर्देश पर दो दिन तक चले विशेष चेकिंग अभियान के दौरान करीब 700 कनेक्शनों में यह गड़बड़ी पकड़ी गई है। अब तक विद्युत बिल वसूल रही कंपनियों से इसका जुर्माना वसूल करने की तैयारी है।
शहरी क्षेत्र में बिजली के 1839 ऐसे कनेक्शन चिह्नित किए गए थे, जिनके बिलों में लगातार अंतर सामने आ रहा था। मीटर रीडिंग लेकर बिल बनाकर उपभोक्ता तक पहुंचाने का कार्य प्राइवेट एजेंसियों से कराया जा रहा है। यह बात भी सामने आई है कि कुछ उपभोक्ताओं से मिलीभगत कर कम बिल बना दिया, जबकि मीटर में रीडिंग ज्यादा थी। विद्युत निगम के अधिकारियों ने मीटर से रीडिंग लेनी शुरू की तो पूरे बिल बन गए। जिससे एक-एक उपभोक्ता का बिल कई गुना हो गया। कुछ उपभोक्ताओं ने बिल ही देना बंद कर दिया।
शासन तक शिकायतें हुईं और मामले पकड़े गए तो विद्युत निगम के उच्चाधिकारी हरकत में आए। चिह्नित किए गए 1839 कनेक्शनों की दो दिन में जांच कराई गई। विद्युत निगम के अधीक्षण अभियंता रविंद्र गुप्ता के नेतृत्व में 18 टीमें बनाई गईं और एक साथ चेकिंग शुरू की गई। चेकिंग के दौरान मीटर रीडिंग में गड़बड़ी पाई गईं। टीम ने प्रत्येक उपभोक्ता का अलग से मीटर लगाकर रीडिंग चेक की तो रीडिंग अलग ही निकली।
विद्युत निगम की टीमों ने अलग से लगाए गए मीटरों के अनुसार उपभोक्ताओं के बिल बनाकर दे दिए। बताया जा रहा है कि 1731 कनेक्शन दो दिन में चेक किए गए। अभी तक लगभग 700 कनेक्शनों में गड़बड़ी सामने आ चुकी है। जिनसे लगभग 30 लाख रुपये भुगतान की वसूली की जा चुकी है। इसके अलावा बिलिंग करा रही निजी कंपनियों पर भी जुर्माना लगाने की तैयारी है।
प्राइवेट कंपनियों से वसूला जाएगा जुर्माना
अधीक्षण अभियंता रविंद्र गुप्ता ने बताया कि प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों ने उपभोक्ताओं के गलत बिल बनाकर विद्युत निगम का काफी नुकसान किया है। उपभोक्ताओं से बिल की वसूली की जा रही है, जबकि निजी कंपनियों पर भी जुर्माना लगाया जाएगा। उनके बिल रोके जाएंगे और जुर्माना काटा जाएगा।
जिले में है करीब साढ़े छह लाख उपभोक्ता
सहारनपुर जनपद में शहरी और ग्रामीण क्षेत्र को मिलाकर करीब साढ़े छह लाख विद्युत उपभोक्ता हैं। इनमें करीब साढ़े चार लाख उपभोक्ता ग्रामीण क्षेत्र के हैं, जबकि दो लाख उपभोक्ता शहरी क्षेत्र के हैं। अभी शासन के निर्देश पर चिह्नित 1839 कनेक्शनों को लेकर जांच हो रही है। यदि शहरी क्षेत्र के ही अन्य उपभोक्ताओं के कनेक्शन को लेकर भी यह जांच शुरू हुई, तो बड़ा गोलमाल सामने आ सकता है।