सहारनपुर। खलासी लाइन स्थित आर्य समाज में चल रहे 65 वें वेद प्रचार सप्ताह के पांचवें दिन विशेष यज्ञ का आयोजन किया गया। आचार्य संजीव आर्य ने कहा कि अपरिग्रह यानि आवश्यकता से अधिक संग्रह नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छा जीवन जीने के लिए मस्तिष्क में अनावश्यक विचारों के संग्रह से बचना चाहिए।
रविवार को मुजफ्फरनगर से पधारे आचार्य संजीव आर्य के पौरोहित्य में यज्ञ हुआ। मुख्य यज्ञमान सुभाष सैनी-अंजू सैनी, अक्षय यादव-अर्चना यादव, जीवेश, रविंद्रा रहे। भजनोपदेशक वीरेंद्र मिश्र ने भजनों के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय कर दिया। आचार्य ने कहा कि अधर्म से बचने में ही हमारा विकास संभव है। अधर्म की चकाचौंध हमारे जीवन को दिशाहीन कर देती है। उन्होंने कहा कि उपासना करने के लिए व्यक्ति को योग अभ्यासी होना चाहिए। ऋषि दयानंद ने भी कहा है कि आर्य व्यक्ति कभी व्यसनी नहीं होता, उसे पांचों यमों का पालन करना चाहिए। उन्होंने अपरिग्रह के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि अच्छा जीवन जीने के लिए मस्तिष्क में अनावश्यक विचारों का संग्रह नहीं होने देना चाहिए। मंच संचालन डॉ. पूर्णचंद्र शास्त्री ने किया। रमेश राजा, मधुकांत राणा, शोभा आर्य, मुनीश आर्य, सुधीर कुमार, जयप्रकाश धीमान, अनिता आर्य, राजकुमार आर्य, सुरेंद्र चौहान, सुदेश राणा, रविकांत राणा, सुरेश सेठी, शांति देवी, देवेंद्र आर्य, रामकिशोरी, किशनलाल शमा, रघुनंदन प्रसाद आर्य, योगराज, विजय कुमार गुप्ता, रविन्द्र आर्य, सुमन गुप्ता, आदि रहे।