सहारनपुर। जिलाधिकारी पीके पांडेय ने कहा कि ग्रामीणों का जीवन स्तर ऊपर उठाने के लिए ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमें परंपरागत स्वरोजगार स्थापित करने होंगे, जिससे हमारे ग्रामीण कुटीर उद्योगों को नई दिशा मिल सकें। उन्होंने बैंकों का आह्वान किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य कर रहे स्वयं सहायता समूहों को बैंक ऋण देने में मानवीय दृष्टिकोण अपनायें।
बृहस्पतिवार को डीएम ने माटकी झरौली स्थित पीएनबी आरसेटी संस्थान में संचालित एक माह के प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि देश के आर्थिक विकास मे नारी के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने महिला प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरूआत करने में आरसेटी का योगदान की सराहना की।
मुख्य विकास अधिकारी संजीव रंजन ने कहा कि हुनरमंद को कभी भी किसी के सहारे की जरूरत नहीं होती, रोजगार खुद चल कर उनके आता है। बैंकों को चाहिए कि ऐसे हुनरमंदों को ऋण देने में कोताही ना बरतें। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी दूर करने के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जाने जरूरी है। आरसेटी के राज्य निदेशक नारायण चान्याल ने कहा कि पूरे देश में लगभग 585 आरसेटी संचालित हैं। ग्रामीण क्षेत्र की बेरोजगारी को दूर करने लिए यह एक बेहतरीन पहल है। परियोजना निदेशक चंन्द्रशेखर ने कहा कि देश को आगे बढ़ाने में समूह अपना सहयोग दे रहे है। कार्यक्रम में महिलाओं को आचार, पापड़, झाडू, एवं डोना पत्तल बनाना, डेयरी उत्पाद, अगरबत्ती, धूपबत्ती, कपूर, मशरूम एवं वर्मी कम्पोस्ट आदि के बारे जानकारी दी गई। संयोजक अमित कुमार चौबे एवं नेहा जिंदल ने भी अपने विचार रखे। ब्यूटी पार्लर के 22 व स्वयं सहायता समूह के 36 महिला प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाणपत्र वितरित किये गए। सरनजीत कौर, अरूण जैन, लक्ष्मण, रामविलास मंगती, रेणू, रेखा आदि रहे।