गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा जानखेड़ा, मची चीख-पुकार
सहारनपुर। गांव जानखेड़ा सुबह-सुबह गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा। करीब दस राउंड फायरिंग से हर ओर दहशत पसर गई। ग्रामीणों में अफरातफरी का माहौल था। जब वे परशुराम के घर पहुंचे, तो हर ओर खून बिखरा पड़ा था। अपने मासूम बेटे अंशुल को खून से लथपथ देखकर मोनिका की चीख निकल गई। वह बेटे के शव से लिपटकर बुरी तरह रोने लगी। हर ओर चीख-पुकार का माहौल था। गांव में हर कोई बच्चे की मौत पर बेहद दुखी था। अंशुल कक्षा तीन में पढ़ता था।
पूरे परिवार का सफाया करना चाहता था सचिन
सचिन अपने ससुराल वालों का पूरी तरफ सफाया करना चाहता था। घर पर मोनिका और उसकी मां नहीं थी, नहीं तो वह उन्हें भी मौत के घाट उतार देता। एसएसपी दिनेश कुमार से मोनिका ने बिलखते हुए कहा कि पति तो उसका था ही नहीं, जीने का एक ही सहारा उसका बेटा अंशुल था। लेकिन दरिंदे ने अंशुल को भी उससे छीन लिया। अब वह किसके सहारे जिएगी। मोनिका ने एसएसपी को बताया कि उसने रामपुर मनिहारान पुलिस से शिकायत की थी। वहां कोई कार्रवाई नहीं हुई तो तत्कालीन एसएसपी से मिली थी। उन्होंने रामपुर थाने जाने को बोल दिया, लेकिन थाना पुलिस ने उसकी नहीं सुनी। जब सचिन जेल से जमानत पर बाहर आया तो वह गायब हो गया। उसके परिजनों ने उसके अपहरण की झूठी रिपोर्ट उसके मायके वालों के खिलाफ दर्ज करा दी थी।
पंकज भी था निशाने पर, नहीं आया दिल्ली से
सचिन का साला पंकज दिल्ली में किसी कंपनी में नौकरी करता है। वह रविवार को आता है और सोमवार सुबह दिल्ली के लिए निकल जाता है। इस बार पंकज दिल्ली से किसी कारणवश नहीं आ सका था। यदि वह होता तो उसे भी मारने की योजना सचिन ने बना रखी थी। पंकज का कहना था कि सचिन की नजर हमारी प्रॉपर्टी पर थी।
खून से लाल हो रही सहारनपुर की धरती
डरावने आंकड़े
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12 अक्तूबर-देवबंद में ही भाजपा नेता धारा सिंह की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या
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