बीएचयू अस्पताल के ओपीडी हाल में खाली कुर्सियां।
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मारपीट के विरोध में बीएचयू अस्पताल और ट्राम सेंटर के रेजिडेंटों की हड़ताल दूसरे दिन मंगलवार को भी जारी रही। अस्पताल प्रशासन से रेजिडेंट से वार्ता की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। लिहाजा दूरदराज से इलाज के लिए आए मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी। कई मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा।
कुछ ओपीडी हाल के बाहर बैठकर डॉक्टरों का इंतजार करते रहे। उधर, 72 घंटे के भीतर मांगें पूरी न होने पर रेजिडेंटों ने इमरजेंसी सेवाओं को भी ठप करने की चेतावनी दी है। स्पेशल वार्ड के बगल में कैंटीन के पास रविवार दोपहर एक मरीज के तीमारदारों ने दो जूनियर डॉक्टरों की पिटाई कर दी थी। इसके विरोध में सोमवार सुबह छह बजे से रेजिडेंट हड़ताल चले गए।
वह सुरक्षा और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रशासन दो दिन बाद भी हड़ताल समाप्त कराने में असफल रहा। लिहाजा, मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। इमरजेंसी सेवा चल रही है, लेकिन इससे मरीजों को मरीजों को राहत नहीं मिल पा रही है। चिकित्सक यहां से मरीजों को ओपीडी में भेज रहे हैं, लेकिन ओपीडी ठीक से चल नहीं रही है।
उधर, डॉक्टर्स लाउंज में बैठक कर रेजिडेंटों ने अस्पताल प्रशासन द्वारा अब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाने पर नाराजगी जताई। चेतावनी दी कि यदि 72 घंटे में मांगें नहीं मानी गईं तो इमरजेंसी सेवा भी ठप कर देंगे।
केजीएमयू आरडीए ने किया हड़ताल का समर्थन
रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल से सीनियर डॉक्टर को दिखाने के लिए लगी भीड़।
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बीएचयू में रेजिडेंट की हड़ताल का केजीएमयू स्थित रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन (आरडीए) ने समर्थन किया है। आरडीए अध्यक्ष डॉ. राहुल भारत और महासचिव डॉ. नयनी अमरीन ने आईएमएस बीएचयू प्रशासन से अस्पताल में ड्यूटी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
ओपीडी में ताला, खाली रहीं कुर्सियां
बीएचयू अस्पताल और ट्रामा सेंटर में हड़ताल की वजह से कई विभागों की ओपीडी दूसरे दिन सुबह 11 बजे तक बंद हो गई। न्यूरोलॉजी, जनरल मेडिसिन, इंडोक्राइनोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, टीबी एंड चेस्ट डिपार्टमेंट, गठिया रोग विभाग की ओपीडी में सन्नाटा छाया रहा। बाहर कर्मचारी बैठे रहे जो मरीजों को हड़ताल की जानकारी दे रहे थे।
मरीज बोले, अस्पताल प्रशासन भी नहीं दे रहा ध्यान
रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल से परेशान मरीज व परिजन ।
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स्ट्रेचर पर ही दो दिन से पड़े हैं। सोमवार को इमरजेंसी में दिखाया तो डॉक्टर ने स्त्री रोग विभाग की ओपीडी में जाने को कहा। यहां आने के बाद भी डॉक्टर ने नहीं देखा। पर्चा काउंटर के पास रातभर रहने के बाद मंगलवार को फिर गए तो भी कुछ नहीं हुआ। अस्पताल प्रशासन को इस समस्या पर ध्यान देने की जरूरत है। -तारामती, राबर्ट्सगंज
चक्कर आ रहे थे और शरीर में कमजोरी थी। इस वजह से डॉक्टर को दिखाने आ रही थी। इसी बीच चोट लग गई। किसी तरह इमरजेंसी में आए तो किसी तरह पट्टी हो गई, लेकिन डॉक्टर ने भर्ती करने की सलाह दी। जब पर्चा लेकर दुबारा गए तो इमरजेंसी में तैनात कर्मचारी ने हड़ताल की वजह से भर्ती नहीं किया और लौटा दिया। -शीला देवी, जौनपुर