उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में 'सोने की खुदाई' के लिए एएसआई ने जीएसआई की जिस रिपोर्ट को आधार बनाया, उसी से छेड़छाड़ की बात सामने आई है।
भारतीय भौगोलिक सर्वे (जीएसआई) के लखनऊ सेंटर के जियोफिजिक्स डिविजन के विशेषज्ञों ने यह जानकारी दी है। साधु शोभन सरकार का कहना था कि उन्होंने ख्वाब में राजा राव राम बक्श सिंह किले के नीचे खजाना गड़ा देखा है।
इसी सपने को आधार बनाते हुए एक हजार टन सोने की तलाश में वहां खुदाई की गई, जो 18 अक्टूबर को शुरू हुई। हालांकि, अब तक कुछ हाथ नहीं लगा है।
शुरुआती रिपोर्ट तैयार करने वाले जीएसआई के लखनऊ सेंटर के विशेषज्ञों का कहना है कि उन्होंने अपनी रपट में न तो सोने का जिक्र किया था और न ही खुदाई की सिफारिश की थी।
हालांकि, उन्होंने यह जरूर बताया कि रिपोर्ट में कंडक्टिव मेटेरियल की मौजूदगी की बात जरूर कही गई थी। उनके मुताबिक सभी धातुएं कंडक्टर होती हैं, लेकिन सभी कंडक्टर धातु नहीं होते।
कंडक्टिव मेटेरियल चिकनी मिट्टी (क्ले) और ब्राइन (नमक का पानी) का मिश्रण भी हो सकता है, जो नदी किनारे पाया जाना आम बात है।
31 अक्टूबर को रिटायर होने वाले पूर्व जीएसआई महानिदेशक ए सुंदरमूर्ति ने कहा, "हमारी रिपोर्ट में केवल कंडक्टिव मेटेरियल होने की बात कही गई थी।" उन्होंने बताया कि शुरुआती रिपोर्ट में खुदाई की सलाह भी नहीं दी गई थी।
जीएसआई के एक वरिष्ठ अफसर ने बताया कि अब तक ऐसी कोई तकनीक नहीं मिली, जो धातुओं की मौजूदगी का अंदाजा दे सके। एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया, "सोना मिलने का सवाल ही नहीं था।"