उत्तर प्रदेश में आए दिन कानून-व्यवस्था के नाम पर सेना भर्ती रैलियों के निरस्त होने और इस दौरान अभ्यर्थियों की पत्थरबाजी की घटनाओं को रोकने के लिए सेना भर्ती मुख्यालय की एक योजना को ग्रहण लग गया है।
सेना में भर्ती रैली को समाप्त कर ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन करने के जोनल भर्ती मुख्यालय के प्रस्ताव को सेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह ने खारिज कर दिया है।
इसके साथ ही सेनाध्यक्ष ने सैनिक जीडी, स्टोरकीपर, स्टोरकीपर तकनीकी और सैनिक क्लर्क आवेदकों की भर्ती की अधिकतम आयु 21 से बढ़ाकर 23 वर्ष करने और शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल की जगह इंटरमीडिएट करने के प्रस्ताव को भी रद्द कर दिया है।
सेना प्रमुख का कहना है कि चूंकि यह व्यवस्था देश भर में एक साथ ही लागू की जा सकती है, इसलिए उत्तर प्रदेश में रैलियों के दौरान होने वाली अव्यवस्थाओं को प्रक्रिया बदलने का आधार नहीं बनाया जा सकता है।
अन्य श्रेणी में भर्ती के लिए आयु सीमा बढ़ाने के मामले पर उन्होंने कहा कि यह निर्णय रक्षा मंत्रालय के मैनपावर प्लानिंग के निर्देश पर रद्द किया जा रहा है ।
सेना हर वित्तीय वर्ष में दो कैलेंडर बनाकर भर्ती रैली का आयोजन करती है। आठ दिन तक चलने वाली हर रैली में
संबंधित भर्ती मुख्यालय के अधीन आने वाले 10 से 12 जिलों के 60 से 80 हजार अभ्यर्थी हिस्सा लेते हैं।
रैली से वापस लौटते हुए अभ्यर्थी उग्र होकर बसों, ट्रेनों और लोगों के घरों पर पथराव कर देते हैं। कई बार भर्ती रैलियों को रद्द करना पड़ता है। एक अप्रैल, 2012 से 30 सितंबर, 2012 तक आयोजित छह में से 5 भर्ती रैलियों को रद्द करना पड़ा था।
इन रैलियों के चार हजार से अधिक पद दूसरे राज्यों के भर्ती मुख्यालय ने भरा था। भविष्य में रैलियां स्थगित न हों और पथराव की घटनाएं रोकने के लिए जोनल भर्ती मुख्यालय यूपी व उत्तराखंड ने खुली भर्ती रैली की जगह आवेदन प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव बनाया था।
इसके तहत ऑनलाइन व ऑफलाइन आवेदन व्यवस्था शुरू करने के लिए जोनल मुख्यालय ने इसका प्रस्ताव सेना मुख्यालय भेजा था।