आठ अक्तूबर को विजय दशमी पर डीरेका में पुतला दहन के पहले तीन घंटे के रूपक का मंचन होता है। मैदान में अयोध्या, लंका, किष्किंधा पर्वत, समुद्र, अशोक वाटिका समेत कई स्थानों को तैयार किया गया है। तीनों पुतलों को तैयार करने में दो कुंतल कागज, 25 लीटर पेंट, एक कुंतल मैदे की लेई, एक कुंतल तांत और 90 बांस का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्टेडियम के पूर्वी छोर पर बैरिकेडिंग के सहारे पुतलों को खड़ा किया जाएगा। स्टेडियम के भीतर तीनों दिशा में बैरिकेडिंग कर दर्शक दीर्घा तैयार की जा रही है।
मंडुवाडीह के शमशाद खान उर्फ गुड्डू का परिवार हर साल की तरह पुतलों को बनाने में तल्लीन हैं। पुतले बनाने वाले शमशाद खान और असलम का कहना है कि वे इसे पेशे के तौर पर न लेकर सांस्कृतिक सौहार्द के रूप में देखते हैं। असलम बताते हैं कि उनकी दूसरी पीढ़ी इसे तैयार कर रही है। करीब 30 साल से उनका परिवार ही इसे बनाता है। पुतला बनाने वालों में बाबू, चट्टी, असलम, शाहिद, आर्यन, शिवनाथ, सुबराती, बनारसी, सन्नो, रेहाना, सलमा शामिल हैं।