तारीख-दर-तारीख और वकीलों के सवाल। उस पर इन सवालों के जवाब देना भी नहीं आसान। लोक लाज, शर्म और दबंगई के चलते पीड़िता के साथ-साथ उसके परिवार की भी सामाजिक मौत। यह हालत जिस परिवार पर बीतती है, उसका दर्द भी सिर्फ वही जान सकता है। हम बात कर रहे हैं उन युवतियों, किशोरियों की जोकि हवस का शिकार बनती हैं।
रेप पीड़िता और उसके परिवार को न केवल न्याय पाने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ता है। बल्कि मानसिक, शारीरिक, सामाजिक और आर्थिक संकट से भी दो-चार होना पड़ता है। रेप पीड़िता और उसके कुछ परिजनों से बात की गई। सभी का जवाब लगभग एक जैसा ही था।
सामाजिक और शारीरिक स्तर पर सभी ने दंश झेला था। कहीं धमकी मिली थी, कहीं रिश्तेदारों ने ही मामले को न उछालने के लिए सलाह दी। मगर बात न्याय और दोषियों को सजा दिलवाने की थी। ऐसे में यह लोग सामने आए। पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। कोर्ट में मुकदमा लड़ा। वकीलों के सवालों की बौछारों के जवाब दिए। हौसलों की जीत हुई और आखिर दोषी को उसके किए की सजा मिली।
केस नंबर-1
पिता के एक्सीडेंट की सूचना देकर किया था दुष्कर्म
सरकारी वकील राजीव कुमार ने बताया कि मामला इसी साल मार्च माह का है। गाजियाबाद जिले के मुरादनगर थाना क्षेत्र में रहने वाला शौकीन पड़ोस में रहने वाली 16 वर्षीय किशोरी को यह कहकर दिल्ली जीटीबी अस्पताल ले गया था कि उसके पिता का एक्सीडेंट हो गया है। 4 बच्चों का पिता शौकीन किशोरी को उस समय बहला-फुसलाकर ले गया, जब वह स्कूल से घर वापस लौट रही थी। दिल्ली ले जाकर शौकीन ने किशोरी को बंधक बना लिया और उससे दुष्कर्म किया। मामले की रिपोर्ट पीड़ित परिजनों ने मुरादनगर थाने में दर्ज कराई थी। एडीजे-12 हरकेश सिंह ने नवंबर में आरोपी को दोषी मानते हुए सात साल कैद और 25 हजार जुर्माने की सजा सुनाई।
केस नंबर-2
दूध निकालने गई महिला से रेप
सरकारी वकील लोकेश कुमार ने बताया कि मामला गाजियाबाद जिले के सिंभावली थाना क्षेत्र का है। यहां रहने वाले रहीसुद्दीन ने अनुसूचित जाति की एक महिला के साथ उस समय दुष्कर्म किया था, जब वह अपने घर में भैंसों का दूध निकालने गई थी। मामले की सुनवाई करते हुए एडीजे-एससी/एसटी अश्विनी कुमार सिंह ने रहीसुद्दीन को 10 साल कारावास और 7 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।
पीड़िता के अनुसार चूंकि आरोपी उसके ही पड़ोस का रहने वाला था। इसी के चलते उसके परिवार पर कई बार रिपोर्ट वापस लेने का दबाव बनाया गया। जमानत पर छूटने के बाद तो आरोपी की ओर से धमकी भी मिली, मगर उसने हिम्मत नहीं हारी। तय कर लिया था कि दोषी को उसके किए की सजा दिलवाकर ही दम लूंगी।
केस नंबर-3
दुष्कर्मी-हत्यारे मामा को आजीवन कारावास
सरकारी वकील विद्याभूषण शर्मा के अनुसार गाजियाबाद जिले के लोनी निवासी एक व्यक्ति की 6 साल की बेटी से उसके रिश्ते के साले ने पहले दुष्कर्म का प्रयास किया, फिर गला दबाकर मासूम की हत्या कर दी। घटना 11 जनवरी 2012 की है। आरोपी रामबाबू घर के बाहर खेलती हुई 6 साल की मासूम को बिस्कुट खिलाने का लालच देकर खेतों की ओर ले गया था। पहले उसने मासूम से दुष्कर्म का प्रयास किया। बच्ची के चिल्लाने पर रामबाबू ने गला दबाकर उसकी हत्या कर दी थी। न्यायाधीश एके गुप्ता ने रामबाबू को दोषी मानते हुए उसे आजीवन कारावास और ढाई हजार रुपये की सजा सुनाई।
केस नंबर-4
बीए की छात्रा ने दिलाई बलात्कारी तांत्रिक को सजा
वर्ष 2010 में बुलंदशहर के कचहरी रोड निवासी एक बीए की छात्रा से तांत्रिक ने बलात्कार किया था। पुलिस में शिकायत करने पर आरोपी ने पीड़िता को अंजाम भुगतने तक की धमकी दी। लेकिन छात्रा अडिग रही। कोर्ट में उसने बेहिचक बयान दिए। उसकी दृढ़ इच्छाशक्ति का ही नतीजा है कि कोर्ट से आरोपी तांत्रिक को सात साल की सजा हुई। हालांकि अब मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। लेकिन छात्रा अपने परिजनों के साथ वहां भी लगातार पैरवी कर रहे हैं।
केस नंबर-5
जिद के बल पर दिलाई उम्र कैद
छह साल पहले बुलंदशहर जिले के गांव जलालपुर में पड़ोसी कन्हैया ने बिजेन्द्र सिंह की सात वर्षीय बेटी अंतू के साथ बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी थी। धमकियों के बावजूद बिजेन्द्र सिंह ने पैरवी नहीं छोड़ी। अपने जिद के बल पर बिजेंद्र ने आरोपी को स्थानीय अदालत से उम्र कैद की सजा सुनाई। हालांकि हाई कोर्ट से आरोपी बरी हो गया। लेकिन बिजेंद्र ने इसके विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उसने राष्ट्रपति को भी शिकायत भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। बिजेन्द्र सिंह ने डर-भय को त्यागकर हर हाल में बेटी के रेपिस्ट को सजा दिलाने की ठानी है।
केस नंबर-6
दोषी को सजा दिलाकर माने गंगाशरण
बुलंदशहर जिले के गांव सुलैला में 16 वर्षीय गजराज ने पांच साल पहले नाबालिग लड़की से बलात्कार किया था। इसके बाद आरोपी ने पीड़िता के परिजनों को धमकाकर कार्रवाई से रोके रखा। ऐसे में समाजसेवी डा. गंगाशरण सिंह ने पैरवी अपने हाथ में ली और आरोपी को उम्र कैद की सजा कराने में कामयाबी हासिल की। मामला अब हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
केस नंबर-7
आठ साल से इंसाफ का इंतजार
बुलंदशहर जिले के गांव जाड़ौल निवासी शिक्षक रामचन्द्र सिंह की नाबालिग पौत्री के साथ बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी गई थी। करीमपुर बनबोई निवासी आरोपी संजय ने कार्रवाई न करने और फिर पैरवी रोकने के लिए रामचंद्र को धमकाया, लेकिन वह नहीं झुके। अच्छी पैरवी और प्रभावी साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने संजय को फांसी की सजा सुनाई है। अब मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है।