मुसलमानों को ओम बोलने पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने रविवार को पत्रकार वार्ता में कहा कि योग दिवस पर अखिल भारतीय मुस्लिम महासंघ के कार्यकर्ता ओम का उच्चारण करेंगे। योग को धार्मिक भावनाओं से जोड़ना गलत है। योग ऐसा अभ्यास है, जिससे जिस्म के साथ रूह को भी सुकून मिलता है।
उन्होंने कहा कि इस्लाम अकीदे और ईमान का नाम है। हमारा अकीदा और ईमान कमजोर नहीं है। गीता, रामायण या कोई भी धार्मिक पाठ नीति के अनुसार पढ़ने से मजहब या धर्म परिवर्तन नहीं होता है तो योग करने से कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा कि जो लोग योग का लाभ उठा रहे हैं और ओम का उच्चारण कर रहे हैं तो हमें आपत्ति क्यों है? ओम पवित्र नाम और निराकार है, इसेे बोलने पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि जब हम नीति के तहत नमस्कार, जिंदाबाद और जय बोल सकते हैं तो ओम क्यों नहीं? इस पवित्र नाम से कोई मुसलमान हिंदू नहीं बन जाता। इसी तरह अल्लाहो अकबर कहने से कोई हिंदू मुसलमान नहीं बन जाता। अगर ओम या अल्लाह कहने से देश में अमनो-अमान और इंसानियत का संदेश जाता है तो नीति के अनुसार ओम बोलने में कोई हर्ज नहीं।
योग का शाब्दिक अर्थ जोड़ने का है और हम जोड़ने की बात करते हैं तोड़ने की नहीं। इस मौके पर राष्ट्रीय महासचिव डा. सैयद अजीम नकवी, उपाध्यक्ष शरीफ उर्रहमान खां भी थे।