यतीमखाने की बस्ती में पुलिस ने लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया और उनका आशियाना ध्वस्त कर दिया। महिलाएं सरकारी तंत्र के सामने गिड़गिड़ाती रहीं, लेकिन प्रशासनिक अमले ने एक नहीं सुनी। अफसरों की मौजूदगी में ही महिलाओं को घरों से बाहर निकालकर बस्ती से ही आउट कर दिया गया। इतना ही नहीं यहां पशुशालाओं से पशु खोलकर बाहर कर दिए गए। जो भी कोई विरोध की हिम्मत करता पुलिस उसके साथ अभद्र व्यवहार करती रही। इस दौरान अफसर खमोश बैठे तमाशा देखते रहे।
स्वार रोड पर वक्फ की जमीन पर यतीमखाना बनने का प्रस्ताव था, लेकिन इस पर सालों पहले मकानों का निर्माण कर लिया गया था। बराबर में ही रामपुर पब्लिक स्कूल भी है। यहां से अवैध कब्जा हटवाने की कवायद यूं तो कई माह से कराई जा रही थी, लेकिन अब इसको अंतिम रूप दे दिया गया है।
चार दिन की मशक्कत के बाद तैयारियों के संग पहुंचे पुलिस प्रशासनिक अफसरों की टीम को बस्ती के लोगों ने दौड़ा लिया था, जिसके बाद शनिवार को पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया। शनिवार की सुबह को ही पूरी बस्ती को छावनी में तब्दील कर दिया गया और फिर शुरू हुई कब्जे हटवाने की कवायद। पुलिस व प्रशासन के अफसरों की निगरानी में शनिवार की सुबह जेसीबी का गरजना शुरू हो गया।
पुलिस ने लोगों को घरों से निकालकर कब्जे गिरवाने शुरू कर दिए, जिसके बाद बस्ती में अफरातफरी मच गई। चीख-पुकार और अफरा-तफरी के माहौल के बीच पुलिस व वक्फ विभाग की कवायद चलती रही। दिन भर यहां कार्रवाई चली। इस दौरान हंगामा होता रहा। लोग गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन न तो इस दौरान पुलिस और न ही प्रशासनिक अमले के अफसर ने किसी की सुनी। लिहाजा पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कराते हुए एक-एक कर तीन दर्जन मकानों को ध्वस्त करा दिया गया।