रामपुर। 31 दिसंबर 2007 की रात सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर हुए आतंकी हमले की जांच में कई खामियां पाई गईं। गवाहों के बयान भी बदलते रहे। हाईकोर्ट ने कई बिंदुओं पर प्रश्नचिह्न लगाए हैं।
हाईकोर्ट ने अपने 186 पन्नों के फैसले में कहा कि मामले की जांच और सबूतों में गंभीर कमियां रहीं। पीड़ितों और गवाहों ने एफआईआर या जांच अधिकारियों के सामने 161 सीआरपीसी के बयानों में आरोपियों का कोई विवरण या नाम तक नहीं दिया था। आरोपी गवाहों के लिए पहले से अजनबी थे। ऐसे में पहचान परीक्षण न करवाना मामले के लिए घातक साबित हुआ।
अदालत ने कहा कि गवाहों का अदालत में पहली बार आरोपियों को पहचानना और उनके नाम लेना विश्वसनीय नहीं माना जा सकता, खासकर तब, जब उन्होंने जांच के दौरान ऐसा कुछ नहीं कहा था। संभावना जताई गई कि गवाहों को बाद में तैयार किया गया या आरोपियों को हिरासत में बेपर्दा (बिना ढके) रखे जाने के कारण गवाहों ने उन्हें देख लिया था।