वाटर प्रोब्लम ब्लेज घोषित हो चुके फौजियों के गांव चंदेला में जल निगम ने तीस लाख खर्च करके पूरे गांव के लोगों की प्यास बुझाने के लिए जो पानी का सिस्टम लगाया है, वह अब पूरी तरह से फेल हो चुका है। गर्मी के मौसम में ग्रामीण पेयजल के लिए तरसने लगे हैं। ग्रामीणों ने घपला करने वालों के खिलाफ जांच के बाद कार्रवाई की मांग की की है।
विकास खंड क्षेत्र में उत्तराखंड सीमा पर बसे फौजियों के गांव चंदेला की आबादी करीब तीन हजार से अधिक है। इस ग्राम पंचायत में पहाड़ी टोला की बस्ती भी आती है। गांव के लोग वर्तमान में पेयजल के लिए बेहद परेशान हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, वर्ष 2000 में उनके गांव का पानी बेहद पीला व खतरनाक था। पूर्व ब्लाक उप प्रमुख धर्मवीर मित्तल व पूर्व प्रधान कांतादेवी ने प्रदेश सरकार से पानी की जांच कराई तो बेहद हानिकारक तत्व पानी में पाए गए थे। जलनिगम ने पूरे गांव को वाटर प्राबलम वाला विलेज घोषित कर दिया था।
प्रदेश सरकार ने जलनिगम के माध्यम से वर्ष 2007-08 में गांव में करीब तीस लाख रुपये अधिक खर्च करके एक ओवरहैड टैंक, एक नलकूप व पूरे गांव में पानी की पाइप लाइन बिछाकर पानी की आपूर्ति गांव के लिए दी थी। उस बक्त ग्रामीण बेहद खुश हुए थे। बाद में घटिया क्वालिटी के भूमिगत पाइप लाइन फटने लगीं और नलकूप का सामान भी चोर चुराकर ले गए। जिसके कारण पेयजल व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार ने पाइप लाइन सड़क के बीचोबीच बिछाई थी, जबकि, पाइप लाइन सड़क किनोर बिछानी चाहिए थी।
अब ग्रामीण केवल निजी हैंडपंपों पर ही निर्भर हैं। ग्राम प्रधान बेयंत कौर का कहना है कि पूर्व प्रधान ने उन्हें नलकूप का चार्ज ही नहीं दिया। अब खराब पाइप लाइन को ठीक कराने में करीब 15 लाख से उपर का खर्च है, वह कहां से मरम्मत कराएं। जबकि, जल निगम उनकी सुन ही नहीं रहा है। उधर, पूर्व प्रधान कांता देवी ने कहा कि उनके पास नलकूप का चार्ज देने के लिए कुछ था ही नहीं तो वह उन्हें कौन से अभिलेख देतीं। खंड विकास अधिकारी गुलाब चंद का कहना है कि उनके संज्ञान में कोई मामला नहीं है, फिर भी वह जांच कराकर पेयजल व्यवस्था को बेहतर कराएंगे।