अफसरों की सुस्ती कहें या फिर कुछ और। मगर, शहर को सिटी बसों को उतारने का प्लान हवा हवाई साबित हो रहा है। वोल्वो बसें आने के बाद भी सड़कों पर नहीं उतारी जा सकी हैं, जिससे यूपी सरकार की रामपुर में सिटी बस चलाने की योजना कागजों में ही दौड़ रही है। बसें फिलहाल नगर पालिका के कब्जे में हैं।
शहर में सिटी बस चलाने की घोषणा यूं तो साल भर पहले की गई थी, लेकिन साल भर के बाद अब शहर को दिसंबर में सिटी बसों के संचालन का तोहफा भी दे दिया गया। चुनाव की घोषणा से ऐन पहले तमाम विकास कार्यों का लोकार्पण नगर विकास मंत्री आजम खां ने शहर को सिटी बस का तोहफा भी देने की भी कवायद की थी। दिसंबर में नगर विकास मंत्री ने सिटी बसों को दौड़ाने के लिए हरी झंडी दी थी। सिटी बस के संचालन को हरी झंडी तो दे दी गई, लेकिन इस सपने को जमीन पर नहीं उतारा जा सका है। इसकी वजह कहीं न कहीं सरकारी सिस्टम की लापरवाही है।
शहर में सिटी बस के लिए यूं तो कुल 48 बसें स्वीकृत हैं, जिसमें आठ वोल्वो बसों को भी शामिल किया गया है, लेकिन पहले चरण में परिवहन विभाग को चार बसें ही मिल पाई थीं इसके बाद इतनी ही बसें और मिल गई थीं। उद्घाटन के बाद चार बसों में से दो बसों को कौशांबी के लिए ट्रायल के लिए उतारा गया था, लेकिन कुछ ही दिन में इन बसों को रोक दिया गया। इसकी वजह इन दोनों गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी न होना भी बताई गई है। इन बसों का रूट भी तय न हो पाना है। दो माह गुजर चुके हैं, लेकिन न तो नगर पालिका और न ही रोडवेज इन बसों को संचालित नहीं करा पाया।
लिहाजा इन बसों को फिलहाल नगर पालिका के हैंडओवर कर दिया गया है। यह बसें पालिका में ही धूल चाट रही हैं। नगर पालिका परिषद के माध्यम से इन बसों का संचालन होना है इसलिए रूट व बस के स्टापेज भी इसको ही तैयार करना है। यानि कुल मिलाकर अभी तक सिटी बसों को शहर की सड़कों पर नहीं उतारा गया है। यह बसें कब उतरेंगी इसको लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। फिलहाल तो इंतजार ही लोगों का विकल्प रह गया है।