सूअर से फैली बीमारी
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बताया कि गांव के 500 मीटर दूर स्थित दो घरों में सूअर पालन किया जा रहा था। छह-सात सूअर कई दिन से बीमार हैं। सीएचसी प्रभारी डॉ. नवीन प्रसाद ने बताया कि प्रथम दृष्टया लग रहा है कि बीमारी सूअर से हुई है। कहा कि जांच की जा रही है। मुख्य चिकित्साधिकारी को भी इसकी जांच करने के लिए कहा गया है।
कैसे फैलता है
जब क्यूलेक्स प्रजाति का कोई मच्छर रोग से ग्रसित सूअर या जंगली पक्षियों का रक्त चूसता है तो उस रोग के वायरस मच्छर में पहुंच जाते हैं। जब यह मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो वह व्यक्ति भी इस रोग की चपेट में आ जाता है।
संक्रमण के शिकार व्यक्ति में इस रोग के लक्षण 5 से 15 दिनों के बीच देखने को मिलते हैं। जिसे ‘इंक्युबेशन पीरियड’ कहते हैं। यह रोग अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में सबसे ज्यादा फैलता है। सबसे पहले इस वायरस की पहचान जापान में हुई थी। जिसकी वजह से इस रोग का नाम ‘जापानी इंसेफेलाइटिस’ रखा गया।
बचाव
मच्छर जहां उत्पन्न होते हैं, वहां मेलाथियान नामक कीटनाशक का छिड़काव करें। घरों की खिड़की और रोशनदानों में जालियां लगवाकर रखें। इसके अलावा रात को सोते समय मच्छरदानी का भी प्रयोग करें। इसके अलावा पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। अगर इस रोग से पीड़ित मरीज बेहोशी की हालत में है तो उसके मुंह में कुछ न डालें, उसे पीठ के बल बिल्कुल न लिटाएं। भोजन से पहले और जानवरों के संपर्क में आने के बाद हाथों को जरूर साफ करें।
सिकरौल गांव में कल लगेगा कैंप
सीएमओ डॉ. दीपा सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार को गांव में कैंप लगाया जाएगा। बुखार पीड़ितों की जांच की जाएगी। साथ ही मच्छरों की रोकथाम के लिए लार्वी साइडल का छिड़काव किया जाएगा। उन्होंने लोगों से स्वास्थ्य शिविर में जांच कराने और मच्छरों से बचने के लिए मच्छर दानी का प्रयोग और साफ-सफाई करने के निर्देश दिए हैं।