यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में अव्यवस्थाएं हावी हैं। तमाम कोशिश के बाद जिले
के परीक्षा केंद्रों पर छात्र-छात्राएं जमीन पर बैठकर एग्जाम देने को
मजबूर हैं। जमीन पर बैठकर पेपर हल करना छात्रों के लिए सबसे बड़ी चुनौती
साबित हो रही है, लेकिन इन दिक्कतों से शिक्षाधिकारियों को कोई लेना-देना
नहीं है।
जिले के 82 केंद्रों पर बोर्ड परीक्षाएं चल रहीं हैं। इसमें
करीब 48 हजार परीक्षार्थी परीक्षा दे रहे हैं। परीक्षा को व्यवस्थापूर्ण
ढंग से संपन्न कराने के लिए डीएम से लेकर जिला विद्यालय निरीक्षक तक ने
आदेश जारी कर रखे हैं। मगर, इन आदेशों की जमीनी हकीकत क्या है, इसको जानने
के लिए कोई तैयार नहीं है।
जिले के परीक्षा केंद्रों पर अभी भी फर्नीचर की
व्यवस्था नहीं हो सकी है। लिहाजा तमाम केंद्रों पर सैकड़ों छात्र-छात्राएं
जमीन पर बैठकर परीक्षा देने को मजबूर हो रहे हैं। शहर के ही कई कालेज में
परीक्षा जमीन पर बैठकर दिलाई जा रही है।
शहर के राजकीय जुल्फेकार कन्या
इंटर कालेज, राजकीय बालिका इंटर कालेज समेत कई कालेज में देखने को सामने आ
रहा है। मंगलवार को दसवीं की गणित व गृह विज्ञान की परीक्षा थी,जबकि दूसरी
पाली में इंटर में मनोविज्ञान, शिक्षा शास्त्र की परीक्षा थी।
पहली पाली
में छात्र-छात्राओं की संख्या ज्यादा थी तो छात्र-छात्राओं को जमीन पर
बैठकर परीक्षा देना पड़ा। जमीन पर बैठकर परीक्षा देने से काफी दिक्कतें आ
रही हैं। छात्राओं का कहना है कि सबसे ज्यादा दिक्कत उत्तर पुस्तिकाओं में
लिखने की आ रही है। लिखने में काफी दिक्कत महसूस हो रही है।
इसके साथ ही
काफी देर तक बैठे रहने से थकान भी महसूस हो रही है। मगर, इन सब बातों का
विभाग के अफसरों पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। जिला विद्यालय निरीक्षक माया
देवी का कहना है कि फर्नीचर की कमी को दूर कराने के लिए केंद्र
व्यवस्थापकों को लिखा गया था। उनसे कहा गया था कि वह अन्य स्कूलों की मदद
से फर्नीचर ले सकते हैं।