लंदन में रामपुर के नवाब खानदान की अहम विरासत रहे दो ताजों की बुधवार को नीलामी होगी। नवाब के दोनों ताज आखिर कैसे लंदन पहुंच गए? लंदन की बड़ी कंपनी क्रिस्टीज द्वारा नीलामी का विज्ञापन जारी होने के बाद नवाब परिवार में खलबली मच गई है। इस मुद्दे पर पूरा नवाब खानदान एकजुट है। विधायक और रामपुर नवाब परिवार के काजिम अली खां उर्फ नावेद मियां ने आपत्ति जताई है।
रामपुर राज्य के संस्थापक और प्रथम शासक नवाब फैजुल्लाह खां थे। नवाब फैजुल्लाह खां का जन्म 1733 में बरेली की आंवला तहसील में हुआ था। उन्होंने बाद में रामपुर को रियासत की राजधानी बनाया। इसके बाद दस शासकों ने रामपुर रियासत पर राज किया। रामपुर रियासत के अंतिम शासक नवाब रजा अली खां थे, जिनकी ताजपोशी 26 अगस्त 1930 को हुई थी। लेकिन 1947 में देश आजाद होने के बाद 1949 में रामपुर रियासत का भी देश में विलय हो गया।
देश में विलय होने वाली यह पहली रियासत थी, इसके नवाब रजा अली खां का इंतकाल 6 मार्च 1966 को हो गया था। इसके बाद उनके बड़े बेटे नवाब मुर्तजा अली खां को खिताब याफ्ता (उत्तराधिकारी माना गया)। रामपुर रियासत के समाप्त होने के बाद उनकी विरासत की महत्वपूर्ण चीजें भी रखी गई थीं। लेकिन इनकी बेशकीमती वस्तुएं हीरे जवाहरात भी थे, जिसमें अधिकांश बेशकीमती चीजें किसी दूसरे के हाथों में पहुंच गई थीं। कोठी खास बाग जैसे आलीशान महल में रखी रामपुर रियासत की अनमोल वस्तुएं और लोगों के हाथ भी लग गईं थीं। इनमें रामपुर की रियासत पर बैठे शासकों के दो ताज भी गायब थे। यही ताज इंग्लैंड की राजधानी लंदन में 30 नवंबर को नीलाम किए जाएंगे।
लंदन की क्रिस्टीज नाम की कंपनी जोकि विरासती सामान की ही नीलामी करती है, इसने 18 नवंबर को विज्ञापन भी जारी किया। इस विज्ञापन के जारी होते ही रामपुर रियासत के मौजूदा खिताब याफ्ता नवाब काजिम अली खां उर्फ नावेद मियां ने यह विज्ञापन एक सोशल साइट पर देखा तो वह दंग रह गए। अपनी अपनी फेसबुक वाल पर विज्ञापन का स्क्रीन शॉट लेते हुए नीलामी को अवैध करार दिया और दोनों ताजों के कैसे लंदन पहुंचे इस पर सवाल उठाए। उन्होंने नवाब परिवार को जानकारी दी, इस मुद्दे पर सभी वंशज एकजुट हो गए हैं और नीलामी रोकने व ताज दोबारा हासिल करने के कानूनी पहलुओं पर विचार कर रहे हैं।