रामुपर। जिले में कैंसर के मरीजों के इलाज और जांच की सुविधा नहीं है। इस कारण उन्हें दूसरे शहरों में इलाज कराना पड़ रहा है। कैंसर का महंगा इलाज होने के कारण कुछ मरीज इलाज नहीं करा पाते, जिससे उनकी बीमारी गंभीर रूप ले लेती है और वह बीमारी से अपनी जिंदगी की जंग हार जाते हैं। जिला अस्पताल में प्रत्येक माह चार से पांच मरीज कैंसर पीड़ित पहुंचते हैं, यहां पर जांच और इलाज की सुविधा न होने के कारण उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है।
जिला अस्पताल में हर माह कई मरीज ऐसे आते है, जिनमें कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के लक्षण पाए जाते हैं। जानलेवा कैंसर की बीमारी के इलाज की जनपद स्तर पर अभी तक कोई सुविधा नहीं है, जबकि जिले में कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिले में कैंसर का इलाज तो दूर जांच की भी कोई सुविधा नहीं है।
ऐसे में मरीजों को मेरठ, दिल्ली देहरादून या ऋषिकेश भेजा जाता है। विश्व कैंसर जागरूकता दिवस पर लोगों को कैंसर से बचाव के प्रति जागरूक किया जाता है। वहीं कैंसर रोग से बचाव के उपाय भी बताए जा रहे हैं। जिला अस्पताल में कैंसर रोग का कोई विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है और न ही इस जानलेवा बीमारी की कोई जांच हो पाती है। वहीं मरीज को लक्षण के आधार पर ही हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। कैंसर जानलेवा जरूर है, लेकिन लाइलाज नहीं है, इस घातक बीमारी का समय से इलाज किया जाए तो यह ठीक हो जाती है।
कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए जिला अस्पताल में कैंसर डे-केयर सेंटर में पांच बेड का वार्ड बनाया गया है, जिसमें कीमोथेरेपी की सुविधा मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से ट्रेनिंग के लिए नाम मांगे गए थे, जो उपलब्ध करा दिए गए हैंं। परंतु अभी तक स्टाफ की ट्रेनिंग नहीं कराई गई है। ट्रेनिंग होने के बाद सेंटर शुरू हो जाएगा। जिन भी मरीजों का इलाज एम्स या अन्य बड़े अस्पतालों से चल रहा है और उन्हें आने-जाने में दिक्कत की वजह से दवा लगवाने में परेशानी आ रही है। ऐसे मरीजों को यहां भर्ती करके दवाई लगाई जाएंगी।