रामपुर। इंदौर में दूषित पानी से 15 लोगों की मौत ने जनमानस को हिला दिया है। सवाल यह है कि कई वर्षों से स्वच्छता रैंकिंग में देश में नंबर वन का खिताब लेने वाले इंदौर में ही पीने का पानी साफ नहीं है।
चिंतित लोगों में रामपुर निवासी भी हैं। किसी ने पुरानी व गल चुकी पाइप लाइनों के कारण नाले-नाली की गंदगी घरों तक पहुंचने की समस्या बताई तो किसी ने ओवरहेड टैंक की सफाई की अनदेखी का हवाला दिया। मौके की स्थिति देखने पर यह चिंता तब और बढ़ गई, जबकि शहर भर को पानी पिलाने वाली नगर पालिका के परिसर में मौजूद ओवरहेड टैंक में फरवरी 2024 के बाद से सफाई न होने की स्थिति सामने आई।
यही स्थिति कांशीरामनगर कॉलोनी के टैंक की भी मिली। पालिका परिसर में स्थापित ओवरहेड टैंक से शाहबाद गेट, हाथीखाना, हामिद चौराहा, गंज समेत कई इलाकों में पानी की सप्लाई है।
करीब 15 हजार की आबादी इस पानी पर निर्भर है। इसकी सफाई 23 फरवरी 2024 को कराई गई थी। इसके बाद से ओवरहेड की सफाई का नंबर नहीं आया है, जबकि अधिकारी मानते हैं कि ओवरहेड टैंक एक साल के अंतर से जरूर साफ होना चाहिए। पालिका परिसर के टैंक की सप्लाई पर निर्भर लोगों ने बताया कि पांच दिनों से मोटर जली हुई है। इस वजह से कुछ जगह पानी की किल्लत है, हालांकि पालिका ने वैकल्पिक तौर पर फूलों वाली बगिया के पंप से सप्लाई का प्रबंध किया है।
कांशीराम कॉलोनी के ओवरहेड टैंक की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। यह टैंक काई जमने के कारण अंदर से गंदा है। यही पानी घरों में पहुंच रहा है। ऑपरेटर मुईन बताते हैं कि फरवरी 2024 में इस टैंक की आखिरी बार सफाई हुई थी। बड़ी आबादी को पानी की सप्लाई देने वाले इस टैंक से जुड़े लोग नालियों से गली पाइप लाइन गुजरने से चिंतित हैं। कहते हैं कि इससे कुछ घरों तक गंदा पानी पहुंचता है। कुछ देर टंकी चलाकर यूं ही पानी बहाते हैं फिर उपयोग में लेते हैं।