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Rampur News: मोबाइल ने छीन ली चिट्ठी की पहचान...

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रामपुर। आध्यात्मिक साहित्यिक संस्था काव्यधारा की ओर से सोमवार को ज्वालानगर स्थित एक स्कूल में काव्य संग्रह काव्यधारा के स्तंभ का विमोचन हुआ। कवि योगेंद्र वर्मा व्योम ने यह विकास का शाप है या फिर यह वरदान, मोबाइल ने छीन ली चिट्ठी की पहचान, सुनाकर वाहवाही लूटी।संस्था के संस्थापक अध्यक्ष जितेंद्र कमल आनंद की अध्यक्षता में मुरादाबाद के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मनोज रस्तोगी ने काव्यधारा के स्तंभ (काव्य संग्रह) का विमोचन किया। संस्था द्वारा हिंदी की उत्कृष्ट साहित्यिक सेवाओं के लिए डॉ. प्रेमवती उपाध्याय, डॉ. मनोज रस्तोगी, योगेंद्र वर्मा व्योम, पुष्पा जोशी और बरेली के अभिषेक अग्निहोत्री को सम्मान पत्र, प्रतीक चिह्न व अंग वस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया। कवियों ने शृंगार रस, हास्य-व्यंग्य और सम- सामायिक रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं की वाहवाही लूटी।
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मुरादाबाद से आए डॉ. मनोज रस्तोगी ने कहा गोलों के बीच, तोपों के बीच, दब गयी आवाज, चीखों के बीच। डॉ. प्रेमवती उपाध्याय ने सुनाया कि वट जैसे विनयी बनें, त्याग सभी अभिमान। सुरेश अधीर ने कहा कि ठेल रहा है नाव को, बिन पतवार अधीर, डूबे या मंजिल मिले, यह जाने रघुवीर। जितेंद्र कमल आनंद ने भी काव्य पाठ किया। संचालक राम किशोर वर्मा ने कहा कि हिंदी बने राष्ट्र की भाषा, हम सबकी अभिलाषा है। टालमटोल बहुत हो चुकी, अब निर्णय की आशा है। शायर डॉ. अश्फाक जैदी ने तरन्नुम में उम्दा गजल पेश करते हुए कहा कि मेरे चराग से जिसका चराग जलता है। पुष्पा जोशी प्राकाम्य, राम रतन यादव, डॉ. प्रीति अग्रवाल, अभिषेक अग्निहोत्री, मुरादाबाद के राजीव प्रखर, अनमोल रागिनी, राजवीर सिंह राज़, जसवंत कौर जस्सी, सुबोध कुमार शर्मा शेरकोटी, शिव कुमार शर्मा चंदन, बलवीर सिंह, सोहन लाल भारती, रवि प्रकाश, संस्था के संरक्षक पीयूष प्रकाश सक्सेना, आशा सक्सेना आदि कवियों ने काव्य पाठ किया।
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