रामपुर। 31 दिसंबर 2007 की देर रात रामपुर सीआरपीएफ कैंप पर हमले के दोषी कोर्ट में लचर पैरवी पुलिस की लापरवाही की वजह से हमले के आरोपी बरी हो गए। रामपुर कोर्ट में मामले की पैरवी कर चुके पाकिस्तानी नागरिकों के न्यायमित्र जमीर रिजवी ने बताया कि पुलिस का मुकदमा बेहद लचर था और सबूत ठीक से जमा नहीं किए गए थे। पुलिस कोई चश्मदीद गवाह भी पेश नहीं कर पाई।
उन्होंने बताया कि रामपुर कोर्ट में उन्होंने मामले की पैरवी की तो पुलिस की ओर से मुकदमे में दर्शाए गए साक्ष्य काफी कमजोर थे। साथ ही पुलिस कोई भी चश्मदीद गवाह पेश नहीं कराई, यहां तक की पुलिस यह भी साबित नहीं कर पाई कि आरोपी घटनास्थल पर मौजूद थे, जिससे मुकदमा कमजोर पड़ गया। निचली अदालत से सजा होने के बाद दोषियों ने फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट ने भी माना इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पाया कि जांच में गंभीर खामियां थीं। न तो आरोपियों की पहचान परेड कराई गई, न ही बरामद हथियारों, गोलियों और फिंगर प्रिंट्स को सुरक्षित रखा गया। ब्यूरो