रामपुर। दस जोड़ों की शादियां टूटने के कगार पर थीं। उनके तलाक के मामले न्यायालय में विचाराधीन थे लेकिन शनिवार को लोक अदालत में परिवार न्यायालय की पहल के बाद यह दस जोड़े फिर से साथ रहने को राजी हो गए, जिसके बाद न्यायिक अफसरों की मौजूदगी में जोड़ों ने एक-दूसरे को माला पहनाई। लोक अदालत में 96,526 वादों का निस्तारण किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से शनिवार को लोक अदालत लगाई गई। इसका उद्घाटन जिला न्यायाधीश भानु देव शर्मा ने किया। इसके बाद वादों के निस्तारण का सिलसिला शुरू हुआ जो कि दिन भर जारी रहा। लोक अदालत में प्रमुख मामले में परिवार न्यायालय से जुड़े रहे। परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश अरविंद कुमार की न्यायालय ने 18 वैवाहिक व भरण पोषण समेत अन्य धाराओं के कुल 71 मामलों को निपटाया। इस दौरान दस जोड़े ऐसे थे, जहां पर दोनों के बीच तलाक की नौबत आ चुकी थी। परिवार न्यायालय की पहल के बाद यह दस जोड़े एक बार फिर अपनी जिंदगी एक-दूसरे के साथ बिताने को राजी हो गए। इस दौरान जिला न्यायाधीश भानु देव शर्मा मौजूद रहे।
इसके अलावा एमवी न्यायालय के पीठासीन अधिकारी अशोक कुमार यादव ने 41 मोटर दुर्घटना के वादों का निस्तारण कर आश्रितों को 3,71,33000 रुपये दिलाए। अपर जिला न्यायाधीश द्वितीय अजय कुमार दीक्षित ने दो वादों का निस्तारण कर अर्थदंड के रूप में 500 रुपये प्राप्त किए।
इसी तरह अपर जिला न्यायाधीश डॉक्टर विजय कुमार ने एक वाद का निस्तारण कर अर्थदंड के रूप में एक हजार रुपये प्राप्त किए। इसके अलावा कलेक्ट्रेट न्यायालयों, कैनाल मजिस्ट्रेट, बाट माप विभाग, आबकारी विभाग समेत अन्य विभागों के विभिन्न प्रकार के 88202 मामलों एवं 11 पारिवारिक प्री-लिटिगेशन वाद एवं दीवानी न्यायालयों से 7511 वादों का निस्तारण किया गया। सचिव संदीप सिंह के अनुसार इस प्रकार कुल 96526 मामलों का निस्तारण किया गया।