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Rampur News: शान-ओ-शाैकत के निशां, इतिहास की जुबां ...रामपुर की विरासत है बेमिसाल

Sun, 27 Sep 2026 01:14 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
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रामपुर। उत्तर प्रदेश का रामपुर जिला केवल नवाबों के इतिहास और नवाबी संस्कृति के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध धार्मिक, ऐतिहासिक और आधुनिक धरोहरों के लिए भी खास पहचान रखता है। यहां एक ओर खासबाग पैलेस और लक्खीबाग जैसे स्थल नवाबी दौर की भव्यता और वास्तुकला की गवाही देते हैं तो दूसरी ओर महाभारत कालीन पातालेश्वर महादेव मंदिर भमरौआ, रठौंडा शिव मंदिर और प्राचीन पीपली धाम लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। देश की पहली डिजिटल लेजर तकनीक वाली आर्यभट्ट नक्षत्रशाला और महात्मा गांधी की पवित्र अस्थियों की साक्षी ''गांधी समाधि'' इस जिले को पर्यटन और अध्ययन के दृष्टिकोण से खास बनाते हैं। इसके अलावा करीब 17 हजार दुर्लभ पांडुलिपियों वाली रजा लाइब्रेरी दुनियाभर में रामपुर को खास पहचान दिलाती है।
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शाही विरासत और ऐतिहासिक धरोहर
खासबाग पैलेस
एशिया का पहला वातानुकूलित शाही महल माना जाने वाला खासबाग पैलेस इस्लामिक-मुगल और यूरोपीय वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है। 55 एकड़ में फैले 205 कमरों वाले इस महल में इटालियन संगमरमर, बेल्जियम के झूमर और म्यांमार की सागौन लकड़ी का प्रयोग हुआ है। खासबाग पैलेस नवाबों का ऐतिहासिक शाही निवास है। इसका निर्माण उन्नीसवीं सदी में शुरू होकर 1930 में पूरा हुआ था। इसमें इटालियन संगमरमर, म्यांमार की सागौन लकड़ी और बेल्जियम के कांच के झूमर का उपयोग हुआ। महल में नवाबों के लिए सिनेमा हॉल, म्यूजिक रूम और बॉलरूम भी थे।
शाहबाद का लक्खीबाग
रामपुर रियासत का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थल लक्खीबाग शाहबाद क्षेत्र में स्थित है। लगभग 135-140 वर्ष पूर्व रामपुर के नवाबों द्वारा लगवाए गए एक लाख आम के पेड़ों के कारण इसे ''लक्खीबाग'' कहा जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, रामपुर रियासत के पहले नवाब फैजुल्ला खां अपनी टीम के साथ इसी क्षेत्र में ठहरे थे। यह बाग और परिसर शाहबाद तहसील में लगभग 230.65 एकड़ क्षेत्र में फैला है। इसमें भीतर गांव और मंगोली का रकबा भी शामिल है। लक्खीबाग में नवाबों की एक ऐतिहासिक कोठी भी बनी हुई है।
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बेनजीर कोठी
रामपुर रियासत की बेनजीर कोठी, जो कभी नवाबों की शाही जीवनशैली का प्रतीक थी, अब जर्जर हालत में है। इसका निर्माण नवाबों के गर्मियों के निवास और राजकीय अतिथियों के लिए हुआ था। कोठी यूरोपीय और मुगलिया वास्तुकला का संगम है, जिसमें मेहराब और गुंबद बने हैं। इसके परिसर में विशाल बाग और धार्मिक महत्व का कदम-ए-रसूल भी स्थित है। यह कोठी कई संगीत महफिलों और सांस्कृतिक आयोजनों का केंद्र रही है। नवाब रजा अली खान के वारिसों के बीच चले संपत्ति विवाद में यह कोठी भी शामिल है।
नवाब रेलवे स्टेशन
यह स्टेशन भारतीय रेल के इतिहास में गिने-चुने निजी स्टेशनों में से एक था। इसका निर्माण नौवें नवाब हामिद अली खान ने 1889-1930 के दौरान अपनी रियासत के लिए करवाया था। उन्होंने रामपुर से मिलक तक 40 किलोमीटर लंबी निजी रेल लाइन बिछवाई थी। 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय नवाब रजा अली खान ने इस ट्रेन का उपयोग परिवारों की सुरक्षित यात्रा के लिए किया। 1954 में उन्होंने दो शाही सैलून कोच भारतीय रेलवे को सौंप दिए थे। संपत्ति बंटवारे के विवाद और देखरेख के अभाव में यह स्टेशन बंद हो गया है। एक आकलन के अनुसार करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक बाजार मूल्य का निजी ''नवाब रेलवे स्टेशन'' रामपुर के गौरवशाली रेल इतिहास व स्थापत्य कला को दर्शाता है।

पौराणिक सिद्धपीठ और धार्मिक आस्था के केंद्र
भमरौआ का पातालेश्वर महादेव मंदिर
रामपुर मुख्यालय से 8-10 किमी दूर स्थित यह प्राचीन सिद्धपीठ स्वयंभू शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान यहां पूजा की थी। सावन और महाशिवरात्रि पर यहां लाखों कांवड़िये जल चढ़ाने आते हैं। तराई क्षेत्र में यह मंदिर अपनी पौराणिक मान्यताओं, स्वयंभू शिवलिंग व विशाल मेलों के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर में फाल्गुन महाशिवरात्रि और सावन के सोमवार को विशाल मेले लगते हैं।
रठौंडा प्राचीन शिव मंदिर
रामपुर जिले के रठौंडा गांव में स्थित प्राचीन शिव मंदिर सैकड़ों वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यह सिद्धपीठ रामपुर-शाहबाद मार्ग पर स्थित है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान इस पवित्र स्थल पर भगवान आशुतोष की आराधना की थी। ''रठौंडा'' नाम के पीछे एक लोककथा है, जिसमें रथ के पहिए टूटने पर दिव्य शिवलिंग प्रकट हुआ था। फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि पर यहां विशाल ''रठौंडा का मेला'' लगता है।
पीपली धाम (बाल सुंदरी मंदिर) मिलक खानम
रामपुर जिले के मिलक खानम क्षेत्र में पीपली वन बाल सुंदरी मंदिर एक प्राचीन आध्यात्मिक सिद्धपीठ है, जिसे पीपली धाम भी कहते हैं। मान्यता है कि प्राचीन काल में पीपली के घने वनों में मां भगवती की पिंडी स्वयंभू प्रकट हुई थी। साधु-संतों ने यहां पूजा शुरू की, जिससे यह तपस्वियों की तपोभूमि बन गया। मां बाल सुंदरी को त्रिपुर सुंदरी का बाल स्वरूप माना जाता है। हर शनिवार विशेष पूजा और मेले जैसा माहौल रहता है। चैत्र और शारदीय नवरात्रों में हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

राष्ट्रीय धरोहर और आधुनिक विज्ञान
गांधी समाधि
नई दिल्ली के राजघाट के अलावा रामपुर की गांधी समाधि देश के उन महत्वपूर्ण स्थलों में से एक है, जहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पवित्र अस्थियां सहेजी गई हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान दो बार रामपुर आए थे। गांधी जी की हत्या के बाद, नवाब रज़ा अली खान के प्रयास से 10 फरवरी 1948 को अस्थियां विशेष ट्रेन से रामपुर लाई गईं। 11-12 फरवरी 1948 को जनता दर्शन के बाद, अस्थियों का एक भाग कोसी नदी में विसर्जित किया गया और शेष को भूमिगत दफन किया गया। वर्ष 1960 में रामपुर नगर पालिका ने 50 हजार रुपये से समाधि का निर्माण कराया। फिर प्रदेश सरकार ने 22 करोड़ रुपये से सुंदरीकरण कराया और अब यहां पर्यटन विभाग सुविधाएं विकसित करने की तैयारी कर रहा है।
आर्यभट्ट नक्षत्रशाला
रामपुर में देश की पहली डिजिटल लेजर तकनीक पर आधारित आधुनिक आर्यभट्ट नक्षत्रशाला है। वर्ष 2012 में इसका उद्घाटन कर इसे आम जनता और विद्यार्थियों के लिए खोला गया। इसका गुंबद दर्शकों को अंतरिक्ष का जीवंत त्रिविमीय अनुभव देता है। मुख्य हॉल में 200 लोग एक साथ अंतरिक्ष विज्ञान के शो देख सकते हैं, जो हिंदी-अंग्रेजी में उपलब्ध हैं। परिसर में विज्ञान पार्क और प्रदर्शनी कक्ष भी है, जो बच्चों को विज्ञान सिखाता है। लेकिन दो साल पहले यहां जलभराव के बाद से बंद पड़ी है।
रजा लाइब्रेरी
रजा लाइब्रेरी को कला, शिक्षा एवं धरोहर संरक्षण का केंद्र है। यहां करीब 17,000 पांडुलिपियां हैं। सातवीं से उन्नीसवीं शताब्दी तक की 500 से अधिक कुरान की प्रतियां हैं। इनमें से लगभग 300 सोने के पानी से लिखी व सजाई गई हैं। ऊंट की खाल पर प्रारंभिक ‘कूफी’ लिपि में सातवीं शताब्दी में लिखी गई विशेष कुरान यहां की सबसे बड़ी धरोहरों में से एक है। पूरे विश्व में ऐसी केवल दो प्रतियां हैं जिनमें एक यहां और दूसरी इराक में है। अब इसे अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाने की तैयारी है। इसी कड़ी में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) और आईआईटी रुड़की लाइब्रेरी के भवनों का सुरक्षा ऑडिट कर रिपोर्ट पुस्तकालय निदेशक व जिला प्रशासन को सौंप चुका है।
वर्जन
श्री पातालेश्वर मंदिर भमरौआ में पर्यटन सुविधाएं विकसित करने के लिए 101 लाख रुपये, काली माता मंदिर शांतिपुरम बिलासपुर में 101.27 लाख रुपये, प्राचीन शिव मंदिर डिलारी स्वार में 137.77 लाख रुपये, शिव मंदिर परौता शाहबाद में 57.41 लाख रुपये से निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। शीघ्र ही गांधी समाधि पर पर्यटकों के लिए लाइटिंग का कार्य किया जाएगा। इसके अलावा भी कई धरोहरें हैं, जिनका रखरखाव संबंधित विभागों की ओर से किया जा रहा है। - मनीषा राणा, जिला पर्यटन अधिकारी, रामपुर
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