सावधान! मौजूदा सीजन में आसमान में छाई कोहरानुमा धुंध मामूली नहीं है। यह कई तरह की गैसों का मिश्रण है। इस धुंध के जरिए हम हवा के साथ घुले सल्फर डाई आक्साइड, शीशा, मेटल और नाइट्रोजन आक्साइड के साथ घातक पार्टिकुलेट मैटर 10 माइक्रोन से छोटे घातक कण हमारी सांसों के जरिये खिंच रहे हैं। यह जहरीली गैसें बीमारी बांट रही हैं। पाल्युशन ईकोलॉजी रिसर्च लैब में चल रहे शोध के मुताबिक मौजूदा स्थित बेहद खतरनाक है, इससे बचकर रहना जरूरी है।
दीपावली के बाद से दिल्ली से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में वायुमंडल में धुंध छाई हुई है। इसका प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। यह धुंध सामान्य नहीं है, और यह कोहरा भी नहीं है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नेशनल एयर मानीटरिंग प्रोग्राम के तहत हिंदू कालेज मुरादाबाद के वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा लगाए गए उपकरणों की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। इस रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा समय में दीपावली पर छोड़ी गई आतिशबाजी से निकले लेड, सल्फर डाई आक्साइड और नाइट्रोजन आक्साइड के साथ ही पार्टिकुलेट मैटर 10 माइक्रोन से छोटे घातक कण वायु मंडल में तैर रहे हैं।
इसके साथ ही धान की कटाई हाथ से होने के बजाए कंबाइन मशीनों से होने के कारण पराली को खेतों में जलाए जाने के कारण वायुमंडल में जहरीली गैसों की मात्रा बढ़ी हुई है। यह जहरीली गैसें कहीं कम कहीं अधिक हैं। सूर्य किरणों के प्रभाव से यह आसमान की ओर बढ़ जाती हैं और वायुमंडल में नमी के साथ नीचे आ जाती है, इससे धूल के कणों के साथ सूर्य की किरणों के फैलने तक स्थिर रहती हैं। प्रभाव में अधिक देर रहने से घातक बीमारी जैसे सांस फूलना, लंग्स प्रभावित होने के साथ कैंसर जैसे रोग भी पनप सकते हैं।