बंदी गीता की मौत ने जेल प्रशासन को कटघरे में ला खड़ा किया है। मृतक बंदी के पिता ने जेलकर्मियों पर गीता के साथ मारपीट करने और उसकी हत्या करने का आरोप लगाते हुए मामले की शिकायत एसपी से की है। हालांकि जेल प्रशासन ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
जिला कारागार में महिला बंदी ने शनिवार रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की जानकारी मिलने के बाद गीता के परिवार के लोग भी जिला अस्पताल पहुंच गए। घटना के बाद गीता के परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। गीता के पिता राम भरोसे ने जेल प्रशासन को गीता की मौत के मामले में कटघरे में खड़ा कर दिया है।
आरोप लगाया है कि गीता के ससुरालियों की साठगांठ जेलकर्मियों से थी। इसकी वजह से गीता के साथ महिला जेलकर्मी अच्छा व्यवहार नहीं करती थीं। कई दफा जेल में तैनात महिला कर्मचारी गीता के साथ मारपीट करती थीं। शिकायत के बाद भी जेल प्रशासन उक्त कर्मियों पर कार्रवाई नहीं करता था।
कहा कि उनकी बेटी की हत्या की गई है और हत्या के पीछे जेलकर्मियों का हाथ है। उसने मामले की शिकायत एसपी से भी की है। वहीं, जेल प्रशासन ने हत्या के आरोपों को सिरे नकार दिया है। कार्यवाहक जेल अधीक्षक आदित्य कुमार सिंह के मुताबिक हत्या का आरोप पूरी तरह निराधार है। गीता मानसिक रूप से बीमार चल रही थी।
उसका बरेली मानसिक चिकित्सालय में इलाज भी चल रहा है। पति की हत्या के आरोप में सजा काट रही गीता की आत्महत्या की खबर से ससुराल में कोई गम नहीं दिखा। उसकी सास कमलेश देवी आंगन में चारपाई पर बैठी थीं। जेठानी घर के कामकाज में जुटी थीं।
सास ने दो टूक कहा कि गीता को उसकी करनी की सजा भगवान ने दे दी। केमरी थाना क्षेत्र के गांव जनूनागर के ग्रामीणों के मुताबिक गीता के ससुराल वाले शव देखने के बजाय ये कहते हुए खेतों पर चले गए कि हमारा उससे कोई संबंध ही नहीं है। भोट थानाक्षेत्र के गांव केशो नगली में गीता के पिता घर कोई नहीं था। परिजन जिला मुख्यालय गीता के शव को लेने गए थे।