रामपुर। कोरोना संक्रमण के कारण घर की बाउंड्री के बीच गुजरे दो साल के समय ने विद्यार्थियों की मनोस्थिति, बौद्धिक क्षमता पर भी असर पड़ा। दो साल बाद जब विद्यार्थी स्कूल पहुंचे तो लिखने-पढ़ने से लेकर अन्य गतिविधियों में भी उनकी क्षमता पर प्रतिकूल असर नजर आया। अब स्कूलों में विद्यार्थियों को एक बार फिर शिक्षा के माहौल में ढाला जा रहा है। इसके लिए गीत-संगीत से लेकर क्राफ्ट और विज्ञान आधारित गतिविधियों का सहारा लिया जा रहा है।
स्कूलों में अब प्राइमरी कक्षाओं के विद्यार्थियों को स्मार्ट क्लास और कहानियों के माध्यम से पढ़ाई से नजदीकी बढ़ाई जा रही है। कोरोना संक्रमण काल में सबसे ज्यादा तीन से छह आयु वर्ग के बच्चे प्रभावित हुए हैं क्योंकि शिक्षा की शुरुआत करने वाले तमाम बच्चों को शुरुआती दिन ही स्कूल से दूर रहकर ऑनलाइन क्लॉस के जरिए शिक्षा ग्रहण करनी पड़ी थी। ऐसे में अब इन विद्यार्थियों को नियमित स्कूल और पढ़ाई से जोड़े रखने के लिए नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं।
दयावती मोदी अकादमी की प्रधानाचार्य डॉ. स़ुमन तोमर ने बताया कि नया सत्र शुुरू होते ही विद्यार्थियों को स्कूल में घर की कमी न खले, इसके लिए कक्षाओं में विद्यार्थियों को क्राफ्ट व अन्य प्रतियोगिताएं भी कराई जा रही हैं। व्हाइट हाल पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या डॉ. बसंत गुप्ता ने बताया कि अभिभावक भी बच्चों के स्कूल आने से खुश हैं। उनकी लंबे समय तक मोबाइल इस्तेमाल की आदत में बदलाव आ रहा है। बड़ी कक्षाओं के लिए भी स्कूलों में विज्ञान, क्राफ्ट प्रतियोगिताएं भी कराई जा रही हैं। लेख में सुधार के लिए नियमित अभ्यास कराया जा रहा है।