ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी महाहड़ताल ने आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया। बैंकों और बीमा कर्मियों की हड़ताल से जहां करोड़ों का लेनदेन प्रभावित हुआ, साथ ही ग्राहक भी इधर उधर भटकते रहे।
वहीं भारत संचार निगम, आयकर विभाग में भी हड़ताल का असर देखा गया। इतना ही नहीं रेलवे कर्मियों ने भी इस दौरान केंद्र की नीतियों के खिलाफ हुंकार भरी। साथ ही जमकर नारेबाजी की। उधर लेखपालों और शिक्षा विभाग के कर्मियों की पहले से चल रही हड़ताल ने लोगों को पहले ही परेशान कर रखा है। लेखपालों की हड़ताल से प्रमाण पत्रों को बनाने का काम पूरी तरह ठप हो चुका है। लोग इसके लिए भी दर-दर भटक रहे हैं।
जिले भर की राष्ट्रीयकृत बैंकों के अधिकारी और कर्मचारी शुक्रवार को हड़ताल पर रहे। निजीकरण और केंद्र सरकार की नीति के विरोध में कोई भी बैंक नहीं खुली। बैंकों में पूरे दिन ताले पड़े रहे। बैंक अधिकारी और कर्मचारी कर्मचारी सुबह पंजाब नेशनल बैंक की शाहबाद गेट शाखा पर एकत्र हुए। उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के जिला मंत्री एमके चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार को बैंकों के विलय की प्रक्रिया बंद कर देनी चाहिए। जानबूझ कर ऋण अदा न करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। जिलाध्यक्ष जगमोहन अग्रवाल ने केंद्र सरकार बैंकिंग सेक्टर को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। केंद्र सरकार को स्टेट बैंक के सहयोगी बैंकों को मर्जर नहीं करना चाहिए। उन्होंने सरकार से बैंकों का विलय बंद कर मजबूत बनाने की मांग की।
इस मौके पर ओमप्रकाश, अशोक अग्रवाल, उमेश शर्मा, संदीप यादव, सुरेश कुमार, कैलाश चंद्र, आशुतोष गुप्ता, बीएस राणा, संजय कुमार, एलएन शर्मा, प्रदीप अग्रवाल, राजेश मलिक, एमए खान, अभिनव रस्तोगी, महेश गुप्ता, जनरैल सिंह, राहुल अग्रवाल, एसके बनर्जी, मोहित, विचित्र, सुंदर लाल, प्रमोद कुमार, सुनील कुमार, महबूब अली, गोविंद लाल, शाहरुख, हर्षित गुप्ता भी थे।