डिप्लोमा फार्मेसिस्टों की हड़ताल से दूसरे दिन भी जिलेभर में सरकारी चिकित्सा सेवाएं ठप रहीं। जिला अस्पताल में इमरजेंसी में काम नहीं हो सका, मरीज भटकते रहे। दवा काउंटर नहीं खुलने से भी दिक्कत रही। वार्डों में भर्ती मरीजों के सामने भी संकट आ गया।
दोपहर बाद हड़ताल खत्म होने पर स्थिति ठीक हुई, लेकिन दवाएं फिर भी नहीं बंट सकीं क्योंकि तब तक अस्पताल के खुलने का समय समाप्त हो चुका था। जिसकी वजह से तीमारदार और मरीज दवाओं के लिए भटकते रहे।
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डिप्लोमा फार्मेसिस्टों ने प्रदेश व्यापी आह्वान पर मंगलवार से हड़ताल कर दी थी। मंगलवार को चिकित्सा सेवाएं ठप होने के बाद बुधवार को भी वही स्थिति रही। सुबह से ही अस्पताल पहुंचे मरीज भटकते रहे। न पर्चा बने और न दवाएं मिलीं। सभी काउंटर बंद थे। ओपीडी में डाक्टर दवाएं लिख रहे थे, लेकिन दवा काउंटर पर दवाएं बांटने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई थी। पोस्टमार्टम पर भी कोई फार्मेसिस्ट नहीं पहुंचा। हालांकि आज कोई शव नहीं होने के कारण दिक्कत नहीं हुई।
दोपहर बाद हड़ताल खत्म हुई, लेकिन तब तक अस्पताल बंद होने का समय आ गया। इस कारण दवाएं नहीं बंट सकीं। गुरुवार को जिला अस्पताल में सेवाएं सुचारु हो पाएंगी।