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Rampur News: तीनों दोस्तों की मौत के बाद बांसनगली-अशोकपुर पट्टी गांव में सन्नाटा

Mon, 16 Dec 2024 02:03 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
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रामपुर। बिलासपुर तहसील क्षेत्र के बांसनगली और अशोकपुर पट्टी गांव में रविवार को पूरे दिन सन्नाटा और शोक रहा। कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले हैं। बुजुर्ग, महिलाओं, बच्चों तक की आंखों में आंसू थे। यहां हर कोई अरबाज (20), सुरेश (21) और सूरज (23) की मौत पर शोकाकुल दिखा। भरी जवानी में काल के गाल में समाने वाले इन तीनों दोस्तों के बचपन की याद कर गांव वालों की भी आंखों में आंसू आ जा रहे थे। गांव के लोग तीनों मृतक युवाओं को होनहार बच्चे होना बता रहे थे। ग्रामीणों ने बताया कि गरीबी और आसपास रोजगार के अभाव में यह तीनों बच्चे बाहर रोजी-रोटी कमाने गए थे, ये तीनों आपस में अच्छे दोस्त भी थे। ग्रामीणों ने कहा कि ईश्वर की महिमा देखो तीनों को एकसाथ मौत दे दी।
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बांसनगली के प्रधान खुर्शीद ने बताया कि शनिवार सुबह आठ बजे अरबाज के बड़े भाई दिलशाद ने पिता को फोन भाई की मौत की सूचना दी थी। तभी सुरेश के घर वालों को भी पता चला कि उनका बेटा भी नहीं रहा। सूचना आने के बाद से गांव में सन्नाटा है। शनिवार पूरे दिन और रविवार को भी मोहल्ले में चूल्हे नहीं जले हैं। दोनों परिवारों में रोना-पीटना मचा है। अरबाज अपने माता-पिता का चौथे नंबर का छोटा बेटा था। अरबाज और उसके दोनों बड़े भाई दिलशाद व रिजवान हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में काम करते थे। इसमें अरबाज कारपेंटर का और इसके दोनों भाई बिल्डिंग का काम करते हैं। जबकि, तीसरे नंबर का भाई गांव में ही रहकर खेती करता है। गांव में अरबाज के मोहल्ले के नवाब हुसैन, नाजकत, याकूब, महफूज, इकरार ने बताया कि दिलदार भाई का बेटा अरबाज बहुत सीधा और मेहनती था। यह दो महीने पहले घर आकर 15 दिन रुका भी था। उन्होंने बताया कि दिलदार के बड़े बेटे दिलशाद का फोन आया था वह बता रहा था कि अरबाज के शव का पोस्टमार्टम हो गया है और रविवार शाम पांच से सलोन जिसे रामपुर के लिए निकले हैं। गांव के फजले, नबी अहमद ने बताया कि अरबाज के चार बहनें थीं, ये सभी विवाहित हैं। शनिवार को खबर मिलते ही ये बहनें दोपहर तक मायके आ गई थीं।
तीन भाइयों में छोटा था सुरेश
ग्रामीणों ने बताया कि अरबाज के साथ काल के गाल में समाया सुरेश अपने तीन भाइयों में सबसे छोटा है। यह दोनों तीन साल से हिमाचल प्रदेश में ही कारपेंटर का काम करते थे। एक साल पहले ही सुरेश के बाबा लाखन की बीमारी से मौत हो गई थी। चूंकि, सुरेश छोटा था तो माता-पिता का बहुत लाडला भी था। तोताराम, खेमपाल, राम औतार, धर्मपाल, मान सिंह ने बताया कि सुरेश की मां का रोते-रोते बुरा हाल है। इनके दोनों बच्चों, अरबाज व सुरेश के शव सोमवार तड़के आने की उम्मीद है।
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बहुत खुशमिजाज था सूरज
अशोकपुर पट्टी ग्राम पंचायत के प्रधान रमेश कुमार ने बताया कि उनके गांव का सूरज भी अरबाज और सुरेश के साथ ही हिमाचल प्रदेश में ही रहकर कापरेंटर का काम करता था। सूरज अपने छह भाई-बहन में तीसरे नंबर था। तीन भाइयों में वह सबसे छोटा है। इसके दो भाई और दो बहनें विवाहित हैं। सूरज अभी नवंबर में ही अपने बड़े भाई विक्रम की शादी में घर आया था। 20 दिन पहले ही हिमाचल प्रदेश गया था। वह वहां करीब तीन साल से काम कर रहा था। मौत की खबर सुनकर बड़े भाई विक्रम शनिवार को ही हिमाचल प्रदेश रवाना हो गए थे। गांव के लोगों ने बताया कि मृतक सूरज बड़ा ही खुशमिजाज और खूबसूरत भी था। सूरज की असमय मौत की खबर आने के बाद पूरे गांव में शनिवार से ही सन्नाटा है। शिवचरन का पूरा परिवार रो-पीट रहा है। उधर, खबर सुनकर बहनें और अन्य रिश्तेदार को शनिवार शाम तक ही शिवचरन के घर आ गए थे। सूरज की मौत के गम में उसके मोहल्ले के कई घरों में चूल्हा नहीं जला है।

इस तरह तीनों की हुई मौत
ग्रामीणों ने बताया कि ये तीनों दोस्त अरबाज, सुरेश और सूरज हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन के थाना धर्मपुर क्षेत्र के पंचायत अनहेच के गांव रिहूं में किराए के कमरे में रहते थे। शुकवार रात तीनों दोस्त ठंड से बचने के लिए कोयले की अंगीठी जलाकर कमरा बंद करके सो गए थे। शनिवार सुबह कमरे न खुला होने पर मकान मालिक को चिंता हुई और उसने कई आवाज लगाई। फिर मालिक की सूचना पर आई पुलिस ने खिड़की से अंदर जाकर दरवाजा खोला, देखा तीनों युवक मृत अवस्था में पड़े थे।
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