दीपों के पर्व में जहां एक ओर पूरा जिला झालरों और दीपक-मोमबत्ती की रोशनी में नहा रहा था, वहीं शहर के एक हिस्से में घर से लेकर गली तक अंधेरे में डूबी हुई थी। यहां न सिर्फ जगमगाती झालर और दीपों की रोशनी गायब थी, बल्कि पूरी रात आतिशबाजी का धूम-धड़ाका भी नहीं हुआ।
सिख समाज ने पंजाब में श्री गुरुग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप की बेअदबी के विरोध में सिविल लाइंस क्षेत्र में दीपावली पर न तो झालर-मोमबत्ती जलाई और न ही दीप जलाए। दो घंटे तक तो घरों के बाहर लगे बल्ब भी बंद कर दिए। दीपावली की खुशी के स्थान पर आंखों में श्री गुरुग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप की बेअदबी का रोष नजर आया।
सिख समाज ने पंजाब में श्री गुरुग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप की बेअदबी के विरोध में दीपावली पर झालर, मोमबत्ती और दीपों की सजावट के साथ ही आतिशबाजी के बहिष्कार की घोषणा की थी। मंगलवार को काली पगड़ी बांधकर विरोध जताया था। दीपावली पर बुधवार को बीपी कालोनी में सिख समाज की ओर से सिर्फ दीपावली पूजन किया गया।
गुरुद्वारा संत भाईजी बाबा में मत्था टेककर वाहे गुरु से अरदास की और देश में अमन-शांति की दुआ की। गुरुद्वारा संत भाईजी बाबा के प्रधान दर्शन सिंह खुराना ने कहा कि ये दीपावली सिख समाज के लिए काली दीपावली रही। अवतार सिंह ने कहा कि श्रीगुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से समाज में रोष है।
समाज के लोगों ने घरों के बाहर तक लगे बल्ब भी रात 7 से 9 बजे तक बंद रखे। आतिशबाजी बिल्कुल नहीं की गई। इस दौरान नरेंद्र पाल लक्की, भूपिन्दर सिंह, सेवा सिंह, गुरचरन सिंह, जसमीत सिंह, राधेश्याम, ओमप्रकाश, चरन मासी, गुलशन अरोड़ा आदि मौजूद रहे।