दो माह में सिर्फ 15 हजार लोगों तक ही सेट टॉप बाक्स पहुंच सका है, जबकि सरकारी रिकार्ड के मुताबिक शहर में 25 हजार केबल कनेक्शन हैं। दस हजार घरों तक सेट टॉप पहुंचाना मनोरंजन कर विभाग के साथ ही कंट्रोल रूम संचालकों के लिए चुनौती भरा साबित हो रहा है। एक जनवरी 2016 से केबल टीवी का डिजीटाइजेशन हो चुका है।
सेट टॉप बाक्स लगवाने का काम इन दिनों चलाया जा रहा है। सेट टॉप बाक्स लगवाने को लेकर प्रशासन और केबल आपरेटर भले ही तमाम कोशिशों में लगे हों, लेकिन हकीकत ये है कि काम में बेहद ही सुस्ती बरती जा रही है। दो माह के भीतर सिर्फ 15 हजार सेट टॉप बाक्स ही लगाए गए हैं।
सेट टॉप बाक्स न लगने का खामियाजा मनोरंजन कर विभाग को उठाना पड़ रहा है। सरकारी रिकार्ड के मुताबिक शहर में 25 हजार केबल कनेक्शनों का मनोरंजन कर अब तक आता रहा है। यानि हर माह करीब पांच लाख रुपये मनोरंजन कर विभाग को मिलता है।
अभी तक सिर्फ 15 हजार सेट टॉप बाक्स लगवाने के बाद विभाग के सिर्फ करीब 3.75 लाख रुपये आ रहा है। सेट टॉप बाक्स लगाने में बरती जा रही सुस्ती का खामियाजा मनोरंजन कर विभाग को उठाना पड़ रहा है। मनोरंजन कर अधिकारी पंकज मलिक का कहना है कि कुछ केबल आपरेटर सेट टॉप बाक्स लगवाने में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
अभी दस हजार सेट टॉप बाक्स लगवाए जाने हैं इसके लिए कंट्रोल रूम संचालकों से भी कहा गया है। जिला मनोरंजन कर अधिकारी पंकज मलिक का कहना है कि सेट टॉप बाक्स लगवाना न पड़े इसके लिए कुछ लोग समय बढ़ने के साथ ही इस मुद्दे के कोर्ट में जाने की बात कर रहे हैं, जोकि पूरी तरह निराधार है।