दिल्ली में गिरफ्तार हुआ सीरियल रेपिस्ट सुनील रस्तोगी की पत्नी व उसके पांचों बच्चों को मकान मालिक ने सामान समेत अपने घर से निकाल दिया है। खुले आसमान तले पहुंचे परिवार को उसके बहनोई अपने घर में शरण तो दे दी है, मगर उसने भी शर्म की वजह से दो दिन में घर से निकालने की बात कही है। परेशान पत्नी ने कहा सुनील को अपना पति न कहते हुए कहा कि सरकार रेपिस्ट को भले ही फांसी दे दे, मगर सड़क पर पहुंचे उसके परिवार को गुजारे के लिए कोई मदद कर दे।
उसने दबी जुबान से यह भी कहा है कि वह अब शर्मसार होने के कारण जिंदा भी नहीं रहना चाहती।
ज्ञात हो कि दिल्ली पुलिस ने बच्चियों के साथ कई वर्षों से सीरियल रेप करने के आरोप में सुनील रस्तोगी (38) को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपी ने स्वयं को रामपुर जिले की कोतवाली बिलासपुर की एक कालोनी का निवासी बताया था। पुलिस ने आरोपी का इतिहास खंगाला मगर यहां उसका कोई पता नहीं चल सका था। पुलिस का कहना था कि आरोपी ने बीते आठ साल से रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप कालोनी को अपनी शरण स्थली बना रखा था।
वह वहां छुपकर किराए के मकानों में बदल-बदल कर रहता था। इसके बाद दिल्ली, गाजियाबाद आदि स्थानों पर पहुंचकर रेप करने के बाद फिर उत्तराखंड में छुप जाता था। पुलिस व खुफिया तंत्र भी उसके परिवार को खोजने में लगा था। करीब छह साल पहले उसने रुद्रपुर में एक बच्ची का अपहरण कर रेप की घटना को अंजाम दिया था। जिसका मुकदमा भी रुद्रपुर में दर्ज होने की बात प्रकाश में आई थी। आरोपी युवक को लेकर चार दिनों से ही लोगों में बेहद रोष देखा गया। कालोनी के लोगों का कहना था कि उक्त नाम के युवक को वह जानते भी नहीं है।
कोतवाली क्षेत्र के उत्तराखंड सीमांत क्षेत्र में बहनोई के घर आरोपी की पत्नी और बच्चे मिले। महिला ने बताया कि तीन दिन पूर्व वह एक महान में किराए पर रहती थी। पुलिस द्वारा उसके पति को जब गिरफ्तार किया गया तो मकान मलिक ने उसके सामान को अपने घर में से सड़क पर फेंक दिया और बच्चों समेत उसे भी निकाल दिया। बाद में वह ननदोई के घर में रह रही है। जबकि, उसके सास व ससुर तथा बड़ा पुत्र दिल्ली में रह रहा है। उसने कहा कि बच्चियों के साथ दरिंदगी करने वाला उसका पति नहीं हो सकता। सरकार उसे फांसी दे दे। मगर सरकार उसके बच्चों के लिए कोई ऐसी मदद कर दे, ताकि वह बच्चों समेत कहीं भी गुमनामी की जिंदगी काट लेगी। उसने कहा कि वह शर्म की वजह से अब जिंदा भी नहीं रहना चाहती।