रामपुर। जिला पंचायत कार्यालय में अधिवक्ता फारुख अहमद की गोली मारकर हत्या करने के मामले में आरोपी वरिष्ठ लिपिक असगर अली को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। न्यायमूर्ति समीर जैन की अदालत ने मामले की परिस्थितियों और सीसीटीवी फुटेज के अवलोकन के बाद असगर अली की जमानत अर्जी खारिज कर दी। यह आदेश अब रामपुर पहुंच गया है।
असगर अली के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। अधिवक्ता फारुख अहमद की 12 फरवरी को जिला पंचायत दफ्तर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या की वारदात के बाद पुलिस ने इस मामले में असगर अली को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। असगर की जमानत याचिका रामपुर की कोर्ट से खारिज हो गई थी, जिसके बाद उसने हाईकोर्ट की शरण ली।
हाईकोर्ट में आरोपी की ओर से दलील दी गई कि घटना के दौरान दोनों पक्षों में कहासुनी और हाथापाई हुई थी तथा गोली अचानक चली। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी को खुद भी गोली लगी थी और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के निर्देश पर घटना की सीसीटीवी फुटेज पेन ड्राइव के माध्यम से अदालत में प्रस्तुत की गई। हाईकोर्ट ने फुटेज देखने के बाद प्रथमदृष्टया पाया कि कार्यालय में असगर अली और मृतक के बीच विवाद शुरू हुआ।
इसके बाद असगर अली ने लाइसेंसी पिस्टल निकाली और मृतक का पीछा करते हुए दरवाजे तक गया। हाथापाई के दौरान उसकी पिस्टल से गोली चली, जो मृतक को लगी। फुटेज में घटना के समय आरोपी के हाथ में पिस्टल होना भी दिखाई दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर आरोपी को निर्दोष नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि आरोपी सार्वजनिक सेवक था और उसे कार्यालय में अपनी लाइसेंसी पिस्टल ले जाने की अनुमति नहीं थी, इसके बावजूद उसने हथियार कार्यालय में रखा और उसका इस्तेमाल किया, जिससे युवा अधिवक्ता की मौत हो गई।
इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी जमानत पाने का हकदार नहीं है और उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत अर्जी पर की गई टिप्पणियां मुकदमे के गुण-दोष पर कोई प्रभाव नहीं डालेंगी। यह आदेश रामपुर पहुंच गया है। स्थानीय कोर्ट में जमानत अर्जी खारिज होने का आदेश दाखिल कर दिया है।