यहां सिस्टम की खामी के चलते तारीख पर तारीख नहीं पड़ती, दो-ढाई महीने में इंसाफ हो जाता है। दालरुल कजा (शरई पंचायत) अल हिंद मजलूम और परेशान लोगों के इंसाफ का एक जरिया बन गई है।
शरई पंचायत में तलाक, दहेज, मेहर, जमीन- जायदाद और खुला के मामले निपट रहे हैं। कुरान और हदीस की रोशनी में अब तक यूपी, दिल्ली, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, तमिलनाडु, केरल समेत कई सूबों के 500 से ज्यादा मामले निपटाए जा चुके हैं। 25 से ज्यादा मसलों पर सुनवाई चल रही है। शरई अदालत में फौरन इंसाफ मिलने से इंसाफ की तलाश में आने वालों की तादात भी लगातार बढ़ रही है।
कुरान और हदीस की रोशनी में मुस्लिमों के मामलों को हल करने के लिए मदरसा जामे उल उलूम फुरकानिया पुराना गंज में 1972 दारुल कजा (शरई पंचायत) अलहिंद कायम की गई थी।
फरवरी 2011 में दारुल कजा मुस्लिम पर्सनल-ला बोर्ड की जेरे निगरानी में आ गई। शरई पंचायत में पेचीदा से पेचीदा मसला दो से ढाई महीने में निपटा दिया जाता है। शरई पंचायत में 25 से ज्यादा मसलों पर सुनवाई चल रही है। इनमें ज्यादातर तलाक और खुला के मामले शामिल हैं।