रामपुर/धमौरा। लखनऊ-बरेली हाईवे पर शहजादनगर जीरो प्वाइंट पर रविवार को दिल्ली जा रही साहिबाबाद डिपो की बस सड़क के गलत डिजायन की वजह से पलट गई। बस पलटने से यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। हादसे में परिचालक सहित पांच यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। उधर बस में बैठे 21 अन्य यात्रियों को भी हल्की चोटें आईं। पुलिस ने राहगीरों की मदद से गंभीर रूप से घायल यात्रियों को एंबुलेंस से अस्पताल भिजवाया। उधर, रोडवेज ने दूसरी बस से यात्रियों को गंतव्य को भेजा।
साहिबाबाद डिपो की पिंक बस सेवा 26 यात्रियों के साथ शनिवार सुबह नौ बजे लखनऊ से दिल्ली के लिए चली थी। रविवार तड़के करीब पौने तीन बजे बस शहजादनगर जीरो प्वाइंट के पास पहुंची थी कि सड़क के खराब डिजायन के कारण बस पलट गईं।
इससे यात्रियों में चीख-पुकार मच गईं। सूचना पर शहजादनगर पुलिस और चार एंबुलेंस मौके पर पहुंची। एंबुलेंस से हादसे में घायल संभल जिले के सिरसी निवासी अनस, रिजवान, सरोज और गाजियाबाद निवासी परिचालक दीपक चौधरी, रामेंद्र को उपचार के लिए जिलाअस्पताल भेजा गया। थानाध्यक्ष हरेंद्र यादव ने बताया कि अनस,रिजवान और सरोज लखनऊ से मुरादाबाद तक का बस सफर कर रहे थे। इन घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल भर्ती कराया गया। साथ ही बस में सवार अन्य यात्रियों को दूसरी बस से भेजा गया।
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पहली सीट पर लेटा था परिचालक
सभी यात्रियों का टिकट काटने के बाद परिचालक दीपक चौधरी पहली सीट पर सो गया था। बस भी उसी साइड को पलटी, जिसकी वजह से परिचालक का हाथ खिड़की से बाहर निकलकर बस के नीचे आ गया। उसका हाथ बुरी तरह कुचल गया और हड्डी बाहर निकल गई। गंभीर रूप से घायल परिचालक को जिला अस्पताल से दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया है।
रामपुर डिपो से मांगा मोबिल
फोरमैन बताते हैं कि जब बस गिरी तो सारा मोबिल गिर गया था, जिससे वर्कशाप से मोबिल भेजा गया था और इसके बाद बस चालक जसवीर उसको स्टार्ट करके रामपुर डिपो तक लेकर आया था।
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चालक बोला, विभाग की लापरवाही, सड़क पर संकेतक न डिवाइडर
रोडवेज चालक जसवीर सिंह ने अमर उजाला से बात करते हुए बताया कि वह 32 वर्ष से बस चला रहे हैं। वह साहिबाबाद डिपो में तैनात हैं। कहा कि शहजादनगर जीरो प्वाइंट पर जहां बस दुर्घटना हुई वहां पर कोई भी संकेतक नहीं था। दो सड़क ऊंची-नीची पहाड़ के जैसे थी। नियमानुसार यहां पर लोहे की रेलिंग, संकेतक और रिफ्लेक्टर होने चाहिए। कहा कि यहां पर मिट्टी डाली गई थी, जिससे बस का टायर मिट्टी में धंस गया और बस पलट गई।
फर्स्ट एड होता तो हो सकता था उपचार
पिंक बस सेवा में फर्स्ट एड बॉक्स सिर्फ नाम के लिए लगा हुआ था। इसमें न तो ट्यूब था और न ही लोशन है। यदि लोशन दवा और पट्टी होती तो वहीं पर छिटपुट घायलों का प्राथमिक उपचार हो जाता। बस में फायर सिलिंडर था, लेकिन उसमें एक्सपायर तिथि नहीं लिखी थी।