जेसीबी से खनन कर ट्रक में भरते हुए। (फाइल फोटो)
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कोसी नदी, रामगंगा और पीलाखार में पिछले कुछ सालों से नियम और मानकों की अनदेखी कर मशीनों से खनन किया गया। मानकों के विपरीत खनन का यह मामला हाईकोर्ट भी पहुंचा। जिस पर जिले के दो पूर्व डीएम के खिलाफ कोर्ट ने निलंबन की कार्रवाई किए जाने तक के आदेश दिए थे। मानकों की अनदेखी कर किए गए खनन से पहले से ही अपने अस्तित्व को लेकर जूझ रहीं इन बरसाती नदियों के वजूद पर और भी खतरा हो गया। हालांकि, अब भी इन नदियों को सहेजने का काम हो तब भी इन्हें बचाया जा सकता है।
प्राकृतिक संसाधनों के लिहाज से रामपुर में कोई कमी नहीं रही। छोटा सा जिला होने के बाद चारों ओर नदियां। हरा भरा वातावरण तो पानी की कोई कमी नहीं रही, लेकिन वक्त के साथ जिस तरह से प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया गया। उससे व्यापक स्तर पर पर्यावरण प्रभावित हुआ है। कोसी नदी के साथ ही पीलाखार, रामगंगा नदियां दम तोड़ रही हैं। दरअसल, इन नदियों में अर्से से अवैध खनन होता रहा है। वह भी शर्तों के विपरीत। कोसी नदी की ही बात की जाए तो यहां पूर्व में जेसीबी, पोकलैंड जैसी मशीनों का इस्तेमाल कर खनन किया जाता रहा है।
नतीजा यह हुआ कि नदियों में जगह-जगह कुएं की शक्ल जैसे गड्ढे बन गए हैं। नदियों के दम तोड़ने से क्षेत्र का भूजल बेहद नीचे चला गया है। नदियों की धारा तक मुड़ गई है। कोसी नदी की ही बात की जाए तो बरसात के दिनों में जब पानी आता है, गहरे गहरे गड्ढों की वजह से नदी की धारा को मोड़ देता है। कटान की समस्या भी इसी वजह से बढ़ रही है। वहीं, जहां पहले इन नदियों में हमेशा पानी रहता है, अब सिर्फ बरसात के मौसम में ही नजर आता है। ऐसे नदियों को बचाने के लिए जरूरी है कि अवैध खनन के काले कारोबार पर लगाम लगे, ताकि नदियों का अस्तित्व बना रहे। क्योंकि, नदियां नहीं होंगी, तो जीवन का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा। हालांकि, अब अवैध खनन रोकने के लिए जिलाधिकारी के स्तर पर कई कदम उठाए गए हैं।