चुनाव आचार संहिता उल्लंघन और लोक संपत्ति निवारण अधिनियम में आरोपित बसपा विधायक यूसुफ अली की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सेशन कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाले रिवीजन को खारिज कर दिया।
2007 में विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर स्वार से चुनाव लड़े यूसुफ अली के खिलाफ छह अप्रैल 2007 को नायब तहसीलदार संजय मिश्रा की ओर से आचार संहिता उल्लंघन के साथ लोकसंपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मुकदमा दर्ज कराया गया था। मामले में पुलिस ने चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी। मामले की सुनवाई हर रोज चल रही थी। अभियोजन की ओर से गवाही पूरी हो चुकी है।
विधायक यूसुफ अली की ओर से अपने बचाव में 76 गवाहों की सूची कोर्ट में पेश की गई थी। उन्होंने सभी को कोर्ट में तलब करने की मांग रखी थी।
इनमें से अब तक केवल एक की गवाही पूरी हुई है। एसीजेएम प्रथम मनीष कुमार की कोर्ट ने 25 अप्रैल को विधायक के बचाव का अवसर समाप्त कर दिया था।
आदेश को विधायक ने सेशन कोर्ट में चुनौती दी गई थी,जिसमें कहा गया था कि निचली अदालत का फैसला विधि विरुद्ध है।
दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद जिला जज सरोज यादव ने बसपा विधायक यूसुफ अली द्वारा दायर रिवीजन को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि निचली अदालत का फैसला सही है, उसमें कोई त्रुटि नहीं है।