अखिल भारतीय श्री राधा माधव संकीर्तन मंडल के वार्षिकोत्सव में मंगलवार को
सूफी संतों व अष्टछाप कवियों की वाणी और पदों के गायन के बीच ठाकुर जी
भक्ति का ऐसा रंग जमा कि सभी संकीर्तन प्रेमी ठाकुर जी के हो गए। राधे-राधे
और गोविंद हरि के जयघोष से कार्यक्रम स्थल गूंज उठा।
नगर में आदर्श
धर्मशाला और श्री राधा-कृष्ण मंदिर में वार्षिकोत्सव का आयोजन दो चरणों में
किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय संकीर्तनकार मुरलीधर मेहरोत्रा
ने दीप प्रज्जवलन कर किया। इसके बाद गणेश वंदना, गुरु वंदना और श्रीरामचरित
मानस की चौपाइयों से संकीर्तन शुरू हुआ।
संकीर्तनकार मुरलीधर मेहरोत्रा ने
एक के बाद एक कई भजन व पद गाए। जिनमें प्रमुख रूप से वो दिल ही क्या जो
तेरे मिलने की तमन्ना न करे, प्रभु के प्रेम में गाथा कि मैं तुम्हें चाहूं
या न चाहूं, भजो रे नाम गोविंद हरि, राधे गोविंद भजो राधे गोविंद आदि पर
संकीर्तन में मौजूद सभी रसिक राधा-गोविंद की भक्ति में खो से गए।
इसके साथ
ही वृंदावन धाम का गुणगान करते हुए गोवर्धन की मानसिक परिक्रमा की। ठाकुर
जी को छप्प्न भोग लगाया गया और अंत में राधा नाम और आरती का आयोजन हुआ। सभी
रसिकों को प्रसाद वितरित कर संकीर्तन को विश्राम दिया गया।
संकीर्तन में
रामपुर के अलावा मुरादाबाद, बरेली, गाजियाबाद, पीलीभीत, दिल्ली समेत कई
अन्य जनपदों के संकीर्तन प्रेमी भी शामिल हुए। संकीर्तन में श्री राधा माधव
संकीर्तन मंडल के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार अरोरा, युधिष्ठिर मलिक, सुनील
कक्कड़, मुकेश कुमार, जगदीश साधना, केपी सिंह, डिक्की आनंद, महेश जुनेजा,
अखिल अग्रवाल, अनुपम गर्ग रहे।