प्रदेश के नगर विकास मंत्री ने सपा मुखिया मुलायम सिंह के उस बयान को लेकर उनका बचाव किया है, जिसमें उन्होंने कार सेवकों पर फायरिंग करवाने पर दुख जताया था। आजम खां ने कहा कि इसमें कौन सी नई बात है। नेताजी ने यह बात बहुत मजबूरी के आलम में किया था। कारसेवकों को चेतावनी दी गई थी।
यह वाकया 6 दिसंबर का नहीं बल्कि 30 अक्तूबर 1990 का है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान सोमवार को उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह ने कानून की पासदारी की थी। किसी की व्यक्तिगत या धार्मिक पासदारी नहीं की थी। नेताजी के इस बयान पर किसी को एतराज भी नहीं होना चाहिए।
वहीं, साध्वी प्राची की ओर से पश्चिमी यूपी को आतंकवादियों का अड्डा कहे जाने पर आजम खां ने कहा कि जिन लोगों ने मुजफ्फनगर के दंगे कराए थे। गरीबों को मारने वाले आतंकवादी थे, जो लोग धर्म के नाम पर हथियारों की ट्रेनिंग दे रहे हैं, वो आतंकवादी ही हैं। इस रास्ते पर ले जाने के यही जिम्मेदार हैं, जिन्होंने मुजफ्फनगर का दंगा किया था।
सुमित्रा महाजन आरक्षण पर दोबारा से चर्चा करने की बात पर आजम खां ने कहा कि आरएसएस की तो बुनियादी सोच यह है कि आरक्षण खत्म होना चाहिए। अब यूपी का चुनाव आ रहा है अब तय कर लें यूपी के मतदाता कि उन्हें आरक्षण रखना है या नहीं।
भाजपा नेता की ओर से राम को सबका पूर्वज कहने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हमने कहां मना किया है। धार्मिक पेशवाओं को अपना पूर्वज कहना कहां बुरी बात है, लेकिन ताली एक हाथ से नहीं बजती।